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Brahmos vs Fatah-3 Cruise Missile: ब्रह्मोस के प्रहार से दहला पाकिस्तान अब भारत की बराबरी करने की हर संभव कोशिश में जुटा है. मिसाइल से फाइटर जेट तक को लेकर पड़ोसी देश की तरफ से अनेक तरह के अनाप-शनाप दावे किए जा रहे हैं. हकीकत यह है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पड़ोसी देश के लिए न तो मिसाइल काम आई और न ही एयर डिफेंस सिस्टम ब्रह्मोस को रोक पाया. अब बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने फतह-3 सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण करने का दावा किया है. इसे ब्रह्मोस का जोड़ीदार भी बताया जा रहा है. सच्चाई यह है कि फतह-3 चीन के HD-1 क्रूज मिसाइल की कॉपी है. दावा यह भी किया जा रहा है कि फतह-3 क्रूज मिसाइल इतनी कम ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम है, जिससे एडवांस रडार सिस्टम के लिए भी उसे डिटेक्ट और इंटरसेप्ट करना मुश्किल है. तो क्या फतह-3 S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को भी धता बताते हुए टार्गेट को तबाह कर सकती है? विविध वजहों के चलते पाकिस्तान के इस दावे पर भरोसा करना मुश्किल है.
एचडी-1 और फतह-3 अभी शुरुआती चरण में दिखाई देते हैं, वहीं ब्रह्मोस लंबे समय से ऑपरेशनल तैनाती में है. ब्रह्मोस का वजन लगभग 2500 से 3000 किलोग्राम के बीच है और यह 200 से 300 किलोग्राम तक का वारहेड ले जाने में सक्षम है. इसकी लंबाई करीब 8.4 मीटर है और इसे भूमि, समुद्र तथा हवा—तीनों माध्यमों से दागा जा सकता है. चीनी सैन्य विश्लेषकों ने एचडी-1 और उससे जुड़े सिस्टम की क्षमताओं को काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है. बीजिंग स्थित सैन्य विशेषज्ञ वेई डोंगसू ने दावा किया कि इसकी तेज गति और कम ऊंचाई पर उड़ान इसे इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन बनाती है. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में मिसाइलों के संयुक्त हमले से विमानवाहक पोत समूहों की वायु रक्षा प्रणाली पर भारी दबाव डाला जा सकता है. हालांकि कई रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि ब्रह्मोस का लंबे समय का परिचालन अनुभव और युद्धक विश्वसनीयता उसे अभी भी बढ़त दिलाते हैं.
भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ दुनिया की सबसे तेज और घातक मिसाइल सिस्टम्स में गिनी जाती है. भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनीया के सहयोग से तैयार की गई यह मिसाइल अपनी अत्याधुनिक तकनीक, सटीक निशानेबाजी और मल्टी-प्लेटफॉर्म लॉन्च कैपेबिलिटी के लिए जानी जाती है. ब्रह्मोस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी रफ्तार है. यह मिसाइल मैक 2.8 से 3.0 (अधिकतम 3700 KMPH की रफ्तार) की गति से उड़ान भर सकती है, जो सामान्य सबसोनिक मिसाइलों की तुलना में लगभग तीन गुना तेज है. इसकी उच्च गति दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली के लिए इसे रोकना बेहद कठिन बना देती है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस की ताकत पाकिस्तान के साथ पूरी दुनिया ने देखी थी. अब पाकिस्तान ने फतह-3 सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल लॉन्च कर ब्रह्मोस की बराबरी करने का दावा किया है. (फाइल फोटो/Reuters)
ब्रह्मोस मिसाइल फायर एंड फॉरगेट तकनीक पर आधारित है, यानी लक्ष्य निर्धारित करने के बाद इसे नियंत्रित करने की आवश्यकता नहीं होती. ब्रह्मोस को थल, जल, पनडुब्बी और वायु चारों प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है. भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों में इसकी तैनाती हो चुकी है. वायुसेना के Su-30MKI फाइटर जेट से भी इसका सफल परीक्षण किया जा चुका है. दूसरी तरफ, पाकिस्तान की ओर से लॉन्च फतह-3 क्रूज मिसाइल को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है. इसे कितने प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है, इसको लेकर भी तस्वीर साफ नहीं है. सबसे खास बात यह है कि बैटलफील्ड में इसकी आजमाइश नहीं हुई है, जिससे इसको लेकर किए जा रहे दावों और सच्चाई में फर्क करना बेहद मुश्किल है. (फाइल फोटो/Reuters)
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ब्रह्मोस की मारक क्षमता 290 से 450 किलोमीटर तक मानी जाती है, जबकि इसके विस्तारित रेंज वाले संस्करणों पर भी काम चल रहा है. एक्सटेंडेड रेंज वाली ब्रह्मोस की मारक क्षमता 1500 किलोमीटर तक होने की संभावना जताई जा रही है. यह मिसाइल अंतिम चरण में समुद्र तल से महज 5 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर सकती है, जिससे दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाते. इसकी सटीकता भी बेहद उच्च स्तर की है और इसका सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) 5 मीटर से कम बताया जाता है. बता दें कि ब्रह्मोस एयरोस्पेस की स्थापना 5 दिसंबर 1995 को भारत-रूस संयुक्त उद्यम के रूप में हुई थी. समय के साथ इसके कई संस्करण विकसित किए गए हैं, जिनमें लैंड-अटैक, शिप-लॉन्च, सबमरीन-लॉन्च और एयर-लॉन्च वेरिएंट शामिल हैं. (फाइल फोटो/Reuters)
भारत अब ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात भी शुरू कर चुका है. फिलीपींस को ब्रह्मोस की आपूर्ति की जा रही है, जबकि वियतनाम समेत कई अन्य देशों के साथ भी बातचीत चल रही है. इसके अलावा छोटे और हल्के संस्करण ‘ब्रह्मोस-एनजी’ के विकास पर भी तेजी से काम हो रहा है, जिसे आधुनिक लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों पर अधिक प्रभावी ढंग से तैनात किया जा सकेगा. ब्रह्मोस भारत की सामरिक ताकत और रक्षा क्षमता का महत्वपूर्ण प्रतीक बनी हुई है. दूसरी तरफ, फतह-3 को अभी कई चुनौतियों का सामना करना है. (फाइल फोटो/Reuters)
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि फतह-3 मिसाइल चीन की HD-1 सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल पर आधारित है और इसे भारत की ब्रह्मोस मिसाइल के जवाब के रूप में विकसित किया गया है. पाकिस्तान की यह नई मिसाइल उसके फतह मिसाइल परिवार का सबसे उन्नत संस्करण मानी जा रही है, जो तेज गति, कम ऊंचाई पर उड़ान और सटीक हमले जैसी क्षमताओं से लैस है. रिपोर्टों के मुताबिक फतह-3 को 8×8 ऑल-व्हील ड्राइव ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर (TEL) पर तैनात किया गया है. इस मोबाइल प्लेटफॉर्म पर दो मिसाइल कैनिस्टर लगाए गए हैं, जिससे इसे युद्धक्षेत्र में तेजी से स्थान बदलने और लॉन्च करने की क्षमता मिलती है. पाकिस्तानी और चीनी रक्षा स्रोतों के अनुसार यह मिसाइल मैक-3 से मैक-4 (अधिकतम 4900 KMPH की स्पीड) की रफ्तार हासिल कर सकती है. इसकी मारक क्षमता 290 किलोमीटर से लेकर 450 किलोमीटर तक बताई जा रही है, जो इसके संस्करण और पेलोड कॉन्फिगरेशन पर निर्भर करेगी.(@awais4226 के X अकाउंट से साभार)
दावा किया जा रहा है कि फतह-3 को केवल जमीनी लक्ष्यों पर हमले के लिए ही नहीं, बल्कि एंटी-शिप मिशनों के लिए भी तैयार किया गया है. इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता ‘सी-स्किमिंग’ प्रोफाइल मानी जा रही है, जिसमें मिसाइल समुद्र की सतह से बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरती है. इससे दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है. हालांकि, अभी यह कहना मुश्किल है कि फतह-3 S-400 जैसे अल्ट्रा मॉडर्न एयर डिफेंस की नजर से बच निकलेगी. फतह-3 का डिजाइन चीन की एचडी-1 मिसाइल से काफी मिलता-जुलता है. HD-1 को चीन की गुआंगडोंग होंगडा कंपनी ने विकसित किया था, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले खनन और ब्लास्टिंग तकनीक के लिए जानी जाती थी. बाद में कंपनी ने रक्षा क्षेत्र में प्रवेश कर इस सुपरसोनिक मिसाइल को निर्यात बाजार के लिए पेश किया. कंपनी के दावों के मुताबिक HD-1 ठोस ईंधन आधारित रैमजेट प्रोपल्सन सिस्टम का उपयोग करती है और मैक-2.2 से मैक-3.5 की गति प्राप्त कर सकती है. इसकी मारक दूरी करीब 290 किलोमीटर बताई गई थी.
फतह-3 के सामने आते ही इसकी तुलना भारत-रूस के संयुक्त उपक्रम से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल से होने लगी है. ब्रह्मोस दुनिया की सबसे सफल और व्यापक रूप से तैनात सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणालियों में गिनी जाती है. इसे डीआरडीओ और रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया ने संयुक्त रूप से विकसित किया था. भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में यह 2006 से सेवा में है. ब्रह्मोस की गति मैक-2.8 से मैक-3 के बीच है और इसके नवीनतम संस्करण 400 किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम बताए जाते हैं. भारत इस मिसाइल के विस्तारित रेंज और हाइपरसोनिक संस्करणों पर भी काम कर रहा है, जिनकी गति भविष्य में मैक-5 तक पहुंच सकती है. ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत इसका युद्धक्षेत्र में सिद्ध रिकॉर्ड और तीनों सेनाओं में व्यापक उपयोग माना जाता है. (फाइल फोटो/Reuters)