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‘नून-रोटी खाएंगे, लेकिन बेटी को पढ़ाएंगे’, पलामू की दादी का संकल्प… खुशी...


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Jharkhand Intermediate Result Commerce: झारखंड इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में पलामू की खुशी कुमारी शर्मा ने कॉमर्स में 459 अंक के साथ जिले में तीसरा स्थान हासिल किया है. आर्थिक तंगी के बावजूद खुशी का सीए बनने का लक्ष्य है. वहीं, उनकी दादी ने कहा कि नून रोटी खा लेंगे, लेकिन बेटी को जरूर पढ़ाएंगे.

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पलामू: कहते हैं कि सफलता हमेशा मेहनत करने वालों पर मेहरबान होती है. आज बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, बल्कि हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं. झारखंड इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के परिणाम में भी बेटियों ने शानदार प्रदर्शन कर यह साबित कर दिया है कि अगर परिवार का साथ और खुद पर भरोसा हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है. पलामू जिले के ऊंटारी प्रखंड के लुंबा गांव की रहने वाली खुशी कुमारी शर्मा ने वाणिज्य संकाय में 459 अंक प्राप्त कर जिले में तीसरा स्थान हासिल किया है. आर्थिक तंगी के बावजूद किराए के मकान में रहकर पढ़ाई करने वाली खुशी आज अपने पूरे गांव और परिवार का नाम रोशन कर रही हैं.

जिले में खुशी ने हासिल किया तीसरी रैंक

खुशी कुमारी शर्मा आरके प्लस टू बालिका विद्यालय हुसैनाबाद की छात्रा हैं. उन्होंने बताया कि उनका सपना शुरू से ही बड़ा था. 10वीं की तुलना में इस बार और बेहतर परिणाम लाने का लक्ष्य था. खुशी ने कहा कि उन्होंने 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाने की तैयारी की थी और उससे ज्यादा अंक प्राप्त होने पर काफी खुशी महसूस हो रही है. उन्होंने बताया कि वह स्टेट टॉपर बनने का सपना लेकर पढ़ाई कर रही थीं. हालांकि जिले में तीसरा स्थान मिला. इसके लिए वह बेहद खुश है. सुबह 7 बजे से 12 बजे तक ऑफलाइन क्लास करती थीं और उसके बाद घर पर तीन से चार घंटे सेल्फ स्टडी करती थीं. पीवाईक्यू और कठिन सवालों की तैयारी के लिए यूट्यूब का सहारा लिया.

आगे चलकर बनना चाहती हैं सीए

खुशी ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है. इसी वजह से वह आगे चलकर सीए बनना चाहती हैं. ताकि अच्छी नौकरी और बेहतर पैकेज के जरिए परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकें. उन्होंने कहा कि कॉमर्स एक बहुत अच्छा विषय है, इसमें रुचि भी आती है और करियर की भी अच्छी संभावना है. खुशी ने बताया कि पहले वह गांव से ऑनलाइन पढ़ाई करती थीं, लेकिन कई डाउट क्लियर नहीं हो पाते थे. इसके बाद उन्होंने पिता से ऑफलाइन पढ़ाई की बात कही. परिवार ने आर्थिक परेशानी के बावजूद डाल्टनगंज में एक किराए का कमरा लेकर मां और दादी के साथ रहने की व्यवस्था की, ताकि पढ़ाई में कोई बाधा न आए. इस दौरान चाचा पिंटू शर्मा का भी भरपूर सपोर्ट मिला. जो कि आर्थिक रूप से भी सपोर्ट करते थे.

दादा करते हैं गार्ड की नौकरी

खुशी के पिता सिंगरौली में प्राइवेट नौकरी करते हैं, जबकि दादा उत्तर प्रदेश में गार्ड की नौकरी करते हैं. परिवार की आमदनी सीमित है, लेकिन बेटी की पढ़ाई के सामने कभी पैसों को आड़े नहीं आने दिया गया. खुशी ने बताया कि उनके चाचा पिंटू शर्मा ने भी हर कदम पर सहयोग किया. परिवार का समर्थन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना. वहीं, खुशी की दादी ने भावुक होकर कहा कि बहुत खुशी की बात है. हमारे बड़े लड़के की बड़ी बेटी ने घर का नाम रोशन किया है. हम गरीब लोग हैं, लेकिन चाहते हैं कि हमारी बेटी पढ़-लिखकर अपना भविष्य बनाए. घर का कोई काम नहीं करने देते, बस कहते हैं पढ़ो और आगे बढ़ो. नून-रोटी खाएंगे लेकिन बेटी को जरूर पढ़ाएंगे. जो बनना चाहती है, वो बनकर रहेगी.

About the Author

Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें



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