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पलामू की जगरानी देवी ने बकरियों के लिए खास देशी चारा तैयार किया है. यह चारा मक्का और गेहूं समेत सात पोषक तत्वों से बना है. इसके सेवन से बकरियों का दूध उत्पादन बढ़ता है. यह मिश्रण गर्मी में पशुओं को तंदुरुस्त रखता है. कमजोर बकरियों के लिए यह सुपर फूड वरदान साबित हो रहा है.
पटनाः गर्मी का मौसम जहां इंसानों के लिए चुनौती लेकर आता है, वहीं पशुओं के लिए भी यह समय काफी कठिन होता है. तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण पशुओं की सेहत पर सीधा असर पड़ता है. खासकर बकरियों में कमजोरी, भूख में कमी और दूध उत्पादन में गिरावट जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. ऐसे समय में उनकी सही देखरेख और संतुलित आहार बेहद जरूरी हो जाता है.
दरअसल, पलामू जिले के रामगढ़ प्रखंड की रहने वाली जगरानी कासी ने एक खास देशी चारा तैयार किया है, जो बकरियों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है. यह चारा न केवल बकरियों को तंदुरुस्त बनाता है, बल्कि उनके दूध उत्पादन को बढ़ाने में भी मदद करता है. स्थानीय स्तर पर तैयार इस चारे की खासियत यह है कि इसमें सात प्रकार के पौष्टिक तत्वों का संतुलित मिश्रण शामिल किया जाता है.
7 प्रकार के अनाज से तैयार हुआ है चारा
रामगढ़ की रहने वाली जगरानी कासी ने लोकल18 को बताया इस चारे को बनाने के लिए मक्का, गेहूं, मिनरल मिक्सचर, नमक, दाल की भूसी और सरसों की खली समेत 7 प्रकार के अनाज का इस्तेमाल किया जाता है. इसे तय मात्रा में मिलाकर तैयार किया जाता है. एक बैच बनाने के लिए 1 किलो मक्का, 250 ग्राम गेहूं, 250 ग्राम दाल की भूसी, आधा किलो मिनरल मिक्सचर, 250 ग्राम नमक और 1 किलो सरसों की खली ली जाती है. सबसे पहले मक्का और गेहूं को दरदरा पीसा जाता है, इसके बाद सभी सामग्री को अच्छे से मिलाकर चारा तैयार किया जाता है.
इस चारे का नियमित उपयोग बकरियों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर डालता है. जिन बकरियों का दूध बंद हो गया है या जो दूध नहीं दे रही हैं, उन्हें यह चारा नियमित रूप से खिलाने पर दूध उत्पादन शुरू हो सकता है. वहीं जो बकरियां पहले से दूध दे रही हैं, उनमें भी दूध की मात्रा में बढ़ोतरी देखी जाती है.
बकरियों को रोजाना इतनी मात्रा में दें
उन्होंने बताया कि इस चारे के खुराक की मात्रा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है. स्वस्थ बकरियों को रोजाना 100 ग्राम तक यह चारा उनके सामान्य भोजन में मिलाकर दिया जा सकता है. वहीं कमजोर बकरियों को 50 ग्राम तक चारा देना पर्याप्त होता है. इसे चावल की भूसी, गेहूं की भूसी या माड़ में मिलाकर खिलाना अधिक प्रभावी माना जाता है.
गांव स्तर पर तैयार यह सस्ता और असरदार चारा न केवल पशुपालकों के खर्च को कम करता है, बल्कि बकरियों की उत्पादकता बढ़ाकर उनकी आय में भी इजाफा करता है. उन्होंने कहा कि इसे 45 रुपए किलो वो उपलब्ध कराती है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.