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बकरी पालन बना ATM: 4 बकरियों से शुरू किया सफर, अब सालाना...


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4 बकरियों से शुरू किया सफर, अब सालाना लाखों का मुनाफा कमा रही हैं महिलाएं

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पलामू के चैनपुर की महिलाओं ने ईंट-भट्टों पर मजदूरी छोड़ बकरी पालन को स्वरोजगार बनाया है. सरकारी योजनाओं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर कुसमी और निर्मला देवी जैसी दर्जनों महिलाएं अब सालाना लाखों रुपये कमा रही हैं. वैज्ञानिक देखभाल और बेहतर चारे के दम पर यह व्यवसाय ग्रामीण महिलाओं के लिए ‘एटीएम’ साबित हो रहा है.

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पलामूः पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड के गुरहा गांव की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है. जहां कभी ये महिलाएं ईंट-भट्टों पर मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का गुजारा करती थीं, वहीं आज बकरी पालन के जरिए सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं. सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर इन महिलाओं ने अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी है. गांव की करीब 40 महिलाएं अब पूरी तरह बकरी पालन पर निर्भर हैं और इसी से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं.

गुरहा गांव की कुसमी देवी की कहानी इस बदलाव की सबसे बड़ी उदाहरण है. करीब 10 साल पहले तक वह दिहाड़ी मजदूरी करती थीं, लेकिन उससे घर चलाना बेहद मुश्किल था. कुसमी देवी ने लोकल18 को बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बकरी पालन के बारे में जानकारी मिली और योजना के तहत 7 बकरियां और एक बकरा मिला. बकरियां साल में दोगुनी-तिगुनी हो जाती हैं, जिससे उनकी बिक्री कर अच्छी आमदनी हो जाती है. आज उनके पास बड़ी संख्या में बकरियां हैं और वे सालाना लाखों रुपये तक कमा रही हैं.

पौष्टिक चारे का उपयोग जरूरी
आगे बताया कि बकरी पालन में मेहनत भी कम नहीं है. महिलाओं को बकरियों के लिए चारा जुटाना, उन्हें चराने जंगल ले जाना और जंगली जानवरों से बचाना पड़ता है. इसके अलावा उन्हें शेड भी उपलब्ध कराया गया है, जिसे उन्होंने सरकारी सहायता और अपनी मेहनत से तैयार किया है. एजोला घास जैसे पौष्टिक चारे का उपयोग कर वे बकरियों की अच्छी देखभाल करती हैं, जिससे उनकी उत्पादकता बढ़ती है.

वहीं निर्मला देवी ने भी अपनी मेहनत से पहचान बनाई है. उन्होंने पांच साल पहले केवल 4 बकरियों से शुरुआत की थी और आज उनके पास 15 से 16 बकरियां हैं. निर्मला देवी बताती हैं कि एक बकरी 10 से 12 हजार रुपये में बिक जाती है. सालभर में बकरियों की देखभाल पर करीब 10 हजार रुपये खर्च आता है, जबकि उन्हें 80 से 90 हजार रुपये तक का मुनाफा हो जाता है.

About the Author

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



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