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रांची के कुलदीप बड़ाईक का बचपन खेतों में मजदूरी करते बीता. उन्होंने किसानों के संघर्ष को बहुत करीब से देखा. आज वे ‘ऑर्गेनिक मैन ऑफ झारखंड’ के नाम से मशहूर हैं. कुलदीप ने 20 हजार से अधिक किसानों की आमदनी दोगुनी की है. वे बिना केमिकल की जैविक खेती से समाज को शुद्ध भोजन दे रहे हैं.
रांची: रांची के कुलदीप बड़ाईक आदिवासी समुदाय से आते हैं. उनका पूरा बचपन खेतों में मजदूरी करते हुए बीता है. उन्होंने बहुत करीब से किसानों के संघर्ष को देखा है. कुलदीप ने महसूस किया कि किसानों को फसल उगाने के बाद सही बाजार और सही दाम नहीं मिल पाता है. इस समस्या को दूर करने के लिए उन्होंने एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से ऑर्गेनिक खेती की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने सीधे खेतों में जाकर किसानों को ‘जीरो टिलेज’ (बिना जुताई) के साथ ऑर्गेनिक खेती करना सिखाया.
ऐसे बढ़ाया किसानों का मुनाफा
कुलदीप ने किसानों को न सिर्फ खेती के नए तरीके सिखाए, बल्कि उन्हें सही मार्केट भी उपलब्ध कराया. अब उनके उत्पाद झारखंड से बाहर दूसरे राज्यों में भी जा रहे हैं. उन्होंने किसानों को अनाज और सब्जियों की फूड प्रोसेसिंग (खाद्य प्रसंस्करण) करना सिखाया. उन्होंने बताया कि कैसे अपने उत्पादों की ब्रांडिंग करके मुनाफे को तीन गुना तक बढ़ाया जा सकता है. वर्तमान में कुलदीप एक एनजीओ और सिविल सोसाइटी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. इससे किसानों तक पहुंचना और उन्हें ट्रेनिंग देना काफी आसान हो जाता है.
क्यों कहा जाता है ‘ऑर्गेनिक मैन ऑफ झारखंड’?
कुलदीप बड़ाईक को पूरे राज्य में ‘ऑर्गेनिक मैन ऑफ झारखंड’ के नाम से जाना जाता है. उन्होंने अब तक 20,000 से अधिक किसानों की आमदनी को दोगुना से ज्यादा करने में मदद की है। इसके साथ ही, वे सीधे तौर पर 1.26 लाख से अधिक किसानों के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं.
कुलदीप बताते हैं कि बचपन में उन्होंने खेतों में यूरिया, डीएपी और कई तरह के रसायनों का अंधाधुंध इस्तेमाल होते देखा था. तब उनके मन में यह सवाल उठता था कि हम अपनों को इतना जहर क्यों खिला रहे हैं? केमिकल वाली ऐसी सब्जियां खाने से समय के साथ कई गंभीर बीमारियां होती हैं. तभी उन्होंने तय किया कि वे समाज को बिना जहर का शुद्ध और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराएंगे. उनका यही उद्देश्य है कि हर घर तक ऑर्गेनिक सब्जी और अनाज पहुंचे. वे अब तक 300 से अधिक गांवों में जाकर किसानों को जागरूक कर चुके हैं.
बचपन में झेली बेहद गरीबी
कुलदीप का शुरुआती जीवन काफी संघर्षों में बीता. उनके पिता एक साधारण किसान थे, इसलिए घर में सिर्फ पेट भरने लायक अनाज ही मिल पाता था. गरीबी के कारण वे अपनी दूसरी इच्छाओं को पूरा नहीं कर पाते थे. कई बार तो अच्छे भोजन के लिए भी सोचना पड़ता था। किसानों का यही संघर्ष कुलदीप को हमेशा प्रेरित करता था. उनके मन में हमेशा यह बात कौंधती थी कि इतनी जमीन होने के बावजूद किसान इतनी तकलीफ में क्यों हैं? इसी संकल्प के साथ उन्होंने ऑर्गेनिक खेती और फूड प्रोसेसिंग के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाने का निश्चय किया, जिसमें वे आज बेहद सफल हैं.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.