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बोकारो के जगप्रीत सिंह पहले ही प्रयास में सीए बन गए हैं. उन्होंने चार साल की उम्र में अपने पिता को खो दिया था. उनकी मां रीना कौर ने कड़े संघर्षों के बीच उन्हें पढ़ाया. जगप्रीत रोजाना 5 से 8 घंटे पढ़ाई करते थे. उन्होंने अपनी सफलता का पूरा श्रेय मां के त्याग को दिया है.
बोकारोः बोकारो जिले के जरीडीह बाजार निवासी जगप्रीत सिंह ने पहले ही प्रयास में CA फाइनल परीक्षा पास कर ली है. लेकिन इस सफलता के पीछे एक ऐसी कहानी है जिसमें एक मां का संघर्ष भी जुड़ा है, जिन्होंने बेटे की पढ़ाई के लिए काफी त्याग किया है. जगप्रीत सिंह ने बताया कि यह सफलता कई वर्षों की कड़ी मेहनत और लगातार किए गए प्रयासों का परिणाम है. उन्होंने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का सपना उन्होंने सालो पहले देखा था, जोकि अब साकार हो गया है.
रोजाना 5 से 8 घंटे की पढ़ाई
जगप्रीत ने स्टडी रूटीन साझा करते हुए बताया कि सीए इंटरमीडिएट परीक्षा पास करने के बाद आर्टिकलशिप के दौरान काम के साथ-साथ वह रोजाना 5 से 8 घंटे पढ़ाई करते थे. वहीं परीक्षा के नजदीक आने पर उन्होंने अपनी पढ़ाई को बढ़ाकर 10 से 12 घंटे कर दिया था. उनकी तैयारी का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन क्लासेज और सेल्फ स्टडी पर आधारित था. इसके अलावा उन्होंने मॉक टेस्ट और रिवीजन टेस्ट पेपर्स का खूब अभ्यास किया.
मां के संघर्ष को सफलता का श्रेय
वहीं, जगप्रीत ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां रीना कौर को दिया. उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि जब वह मात्र चार वर्ष के थे, तभी उनके पिता बलवीर सिंह का निधन हो गया था. इसके बाद उनकी मां ने कठिन परिस्थितियों में उनका पालन-पोषण किया और शिक्षा के लिए हर संभव प्रयास किया.
उन्होंने बताया कि सीए इंटरमीडिएट परीक्षा की तैयारी के दौरान मां ने उनकी पढ़ाई में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए अलग से किराये पर कमरा लिया. जहां वह उनके लिए खाना बनाती थीं. इससे उन्हें न केवल पढ़ाई पर ध्यान करने का मौका मिलता था, बल्कि वह छोटे-मोटे कामों में उलझने से भी बचते थे.
धनबाद से हुई स्कूलिंग
जगप्रीत सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बीआरएल डीएवी भंडारीदह और जीजीपीएस धनबाद से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और सीए की तैयारी में जुट गए.
छात्रों को दी खास सलाह
सीए की तैयारी कर रहे छात्रों को संदेश देते हुए जगप्रीत ने कहा कि कई बार लगातार प्रयासों के बाद छात्रों में चिंता और तनाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, लेकिन यदि पूरी लगन और अनुशासन के साथ प्रतिदिन 4 से 9 घंटे भी पढ़ाई की जाए तो सफलता हासिल की जा सकती है.
उन्होंने कहा कि आर्टिकलशिप के दौरान काम और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है. यदि पूरे सिलेबस को समय रहते अच्छी तरह तैयार कर लिया जाए तो परीक्षा के अंतिम महीनों में पर्याप्त समय रिवीजन के लिए मिल जाता है. जिससे बेहतर अंक प्राप्त किए जा सकते हैं.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.