पलामू. किसी ने बड़े कमाल की बात कही है, मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है. पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है. इसी क्रम में आज जानेंगे पलामू के सुदना गांव से निकले एक साधारण छात्र की कहानी जो आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है. कभी हरिजन माध्यमिक विद्यालय में बोरे पर बैठकर पढ़ाई करने वाले विनय कुमार मेहता आज ‘इंजीनियर गुरु’ के नाम से पूरे पलामू में जाने जाते हैं.
पलामू जिले के सुदना के रहने वाले इंजीनियर विनय कुमार मेहता का इंजीनियर बनने से लेकर आईआईटी में पढ़ाई, टाटा स्टील की नौकरी, सिविल सर्विस का सपना, एक दर्दनाक सड़क हादसा और फिर शिक्षा के माध्यम से हजारों छात्रों का भविष्य संवारने तक का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है.
बोरे पर बैठकर शुरू हुई पढ़ाई, गणित ने बदली जिंदगी
विनय कुमार मेहता ने लोकल 18 से खास बातचीत में बताया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव के हरिजन माध्यमिक विद्यालय में हुई, जहां बच्चे बोरे पर बैठकर पढ़ाई करते थे. बचपन से ही गणित उनका पसंदीदा विषय था. इसी प्रतिभा के दम पर उन्होंने जिला स्कूल की प्रवेश परीक्षा पास की और मैट्रिक तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने पलामू छोड़ पटना का रुख किया और आगे की पढ़ाई के बाद आईआईटी से इंजीनियरिंग की. बाद में बीआईटी सिंदरी और फिर आईआईटी दिल्ली से उच्च शिक्षा हासिल की.
इंजीनियर बने, लेकिन सपना था अफसर बनने का
आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने टाटा स्टील में इंजीनियर के रूप में काम किया. लेकिन उनका सपना भारतीय प्रशासनिक सेवा और पुलिस सेवा में जाने का था. उन्होंने यूपीएससी, गेट और बिहार पीसीएस जैसी कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की. प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा तक सफलता भी मिली, लेकिन मंजिल से पहले ही किस्मत ने करवट ले ली.
एक हादसे ने बदल दी जिंदगी
दिल्ली से रोहतक जाते समय उनकी कार की ट्रैक्टर से टक्कर हो गई. इस दुर्घटना में उनकी आंख का रेटिना क्षतिग्रस्त हो गया. लंबे समय तक इलाज और कई ऑपरेशन के कारण उनका मेडिकल नहीं हो सका और अफसर बनने का सपना अधूरा रह गया. करीब चार साल तक इलाज चलता रहा. जब स्वास्थ्य ठीक हुआ, तो उन्होंने जीवन को नई दिशा देने का फैसला किया.
शौक से शुरू हुई पढ़ाई, बन गया मिशन
विनय कुमार मेहता को शुरू से पढ़ाने का शौक था. इंजीनियरिंग के दौरान भी वे छात्रों को पढ़ाते थे. दिल्ली के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे फिटजी, करियर प्वाइंट और अन्य आईआईटी कोचिंग संस्थानों में उन्होंने पढ़ाया. यहीं उन्हें महसूस हुआ कि शिक्षा के माध्यम से भी समाज में सम्मान पाया जा सकता है समाज में बदलाव लाया जा सकता है. इसी सोच के साथ उन्होंने डेडिकेटेड इंस्टीट्यूट की शुरुआत की.
पलामू लौटे और बदल दी हजारों छात्रों की तकदीर
साल 2006 में उन्होंने पलामू में डेडिकेटेड एकेडमी की शुरुआत की. पहले बैच में 60 छात्र थे, जिनमें से 45 छात्रों ने मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में सफलता हासिल की. इसके बाद सफलता का कारवां लगातार आगे बढ़ता गया. आज उनका संस्थान प्राइमरी से लेकर इंटरमीडिएट शिक्षा, नीट और आईआईटी की तैयारी करवाता है साथ ही साथ सामाजिक गतिविधियों में भी आगे रहता है और रेडियो सम्राट जैसे मंचों का भी संचालन कर रहा है.
आज देशभर में हैं उनके छात्र
इंजीनियर विनय कुमार मेहता ने कहा कि उनके पढ़ाए कई छात्र आज देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ रहे हैं और बड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं. उनके शिष्य क्षितिज कुमार इसरो में वैज्ञानिक हैं, जबकि सुरभि लता, अभिनव कुमार समेत कई छात्र डॉक्टर, इंजीनियर और आईआईटीयन बन चुके हैं. उनका कहना है कि अगर एक शिक्षक ईमानदारी से मेहनत करे, तो वह एक नहीं, हजारों परिवारों की किस्मत बदल सकता है. पलामू की मिट्टी से निकले इस आईआईटी गुरु की कहानी यही साबित करती है कि असली सफलता खुद आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने में है.