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रांची| कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बयान जारी कर कहा कि 21 विधायकों वाली भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में पार्टी का प्रत्याशी नहीं देकर निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन दिया है। इससे स्पष्ट है कि भाजपा का भरोसा लोकतांत्रिक प्रणाली के बजाय खरीद- फरोख्त के माध्यम से चुनाव में जीत हासिल करना है। राज्यसभा चुनाव के पहले ही घोड़ों का नहीं, बल्कि हाथी का व्यापार शुरू हो गया है। एक निर्दलीय के लिए भाजपा ने अपने विधायकों को थोक में प्रस्तावक बना दिया। इससे यही संदेश जाता है कि राज्यसभा चुनाव से पहले ही भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी के बीच खेला हो गया। झारखंडवासियों के मन में ये विचार कौंध रहा है कि जब यह सीट भाजपा की थी, तब उसने अपनी पार्टी से प्रत्याशी क्यों नहीं दिया? झारखंड विधान सभा में एनडीए के 24 विधायक होते हुए भी भाजपा ने एक निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन देकर स्पष्ट कर दिया कि भाजपा को अपनी विचारधारा व नीतियों पर भरोसा नहीं है।
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