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बड़गाईं स्थित 8.86 एकड़ जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ा झटका लगा है। पीएमएलए के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने उनकी ओर से दायर डिस्चार्ज (मुक्ति) याचिका खारिज कर दी है। सोमवार को अदालत ने अपना आदेश सुनाते हुए कहा कि मामले में उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया आरोपों पर विचार करने के लिए पर्याप्त है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने 3 जून को आदेश सुरक्षित रख लिया था। आठ जून को फैसला सुनाया गया। मामला ईडी की ओर से दर्ज ईसीआईआर संख्या 06/2023 से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि बरियातू रोड स्थित बड़गाईं मौजा की 8.86 एकड़ भूमि पर अवैध कब्जे और उससे जुड़े दस्तावेजों में हेराफेरी के लिए एक संगठित भूमि सिंडिकेट सक्रिय था।जांच के दौरान राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के कब्जे से 17 मूल रजिस्टर और बड़ी संख्या में भूमि संबंधी दस्तावेज बरामद किए गए थे। आरोपी जमीन पर नियंत्रण कर रहे थे : कोर्ट अदालत ने कहा कि डिस्चार्ज याचिका पर विचार के दौरान विस्तृत साक्ष्य परीक्षण नहीं किया जा सकता। केवल यह देखा जाता है कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं। यदि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सामग्री मौजूद हो तो आरोप तय किए जा सकते हैं। ईडी की ओर से प्रस्तुत सामग्री और गवाहों के बयानों से प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि 8.86 एकड़ जमीन पर हेमंत सोरेन के कब्जे, नियंत्रण और लाभकारी उपयोग से जुड़े परिस्थितिजन्य साक्ष्य मौजूद हैं। इनमें जमीन की जांच-परख, सत्यापन के निर्देश, भूमि के चारों ओर बाउंड्रीवॉल का निर्माण और सीएमओ अर्जेंट पिंटू अंकित फाइल की बरामदगी शामिल हैं। अदालत ने संतोष मुंडा के बयान का भी उल्लेख किया। आदेश के अनुसार, संतोष मुंडा लंबे समय तक उक्त जमीन पर केयरटेकर रहा और उसने हेमंत सोरेन तथा उनकी प|ी को कई बार वहां आते देखा। -शेष पेज 11 पर
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