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ममता की पार्टी में नया खेला सामने आ गया है. पार्टी सांसद पार्थ भौमिक ने वह सरकारी बंगला खाली कर दिया है, जिसे लंबे समय से दिल्ली में टीएमसी हेडक्वार्टर के रूप में जाना जाता था. इसी जगह बागी गुट मीटिंग किया करता था.
दिल्ली में टीएमसी का पावर सेंटर छिना.
टीएमसी में एक नया ट्विस्ट आ गया है.टीएमसी सांसद पार्थ भौमिक ने नई दिल्ली स्थित अपना वह सरकारी बंगला खाली कर दिया है, जहां से अब तक टीएमसी का दिल्ली दफ्तर चलता था. भौमिक ने इस बंगले की जगह एक फ्लैट आवंटित करने की मांग की थी, जिसे अब लोकसभा सचिवालय ने हरी झंडी दे दी है. न्यूज18 के पास वो डॉक्यूमेंट मौजूद है, जिसमें इसकी जानकारी है.
दिल्ली के लुटियंस जोन में डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड पर स्थित बंगला नंबर 20 अब तक तृणमूल कांग्रेस का पावर सेंटर हुआ करता था. पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री रहे और अब टीएमसी सांसद पार्थ भौमिक का यह बंगला लंबे समय से दिल्ली में पार्टी के मुख्य दफ्तर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था. लेकिन अब इस पते से टीएमसी का नाम हटने जा रहा है. क्योंकि पार्थ भौमिक की मांग पर लोकसभा सचिवालय ने 9 जून को सांसद पार्थ भौमिक को नया बंगला दे दिया है.
पार्थ भौमिक को अब कहां मिला बंगला
पार्थ भौमिक को अब डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित बंगला नंबर 20 (टाइप VI आवास) की जगह ‘हुगली’ (टाइप VII आवास) में फ्लैट नंबर 501 आवंटित किया गया है. संसदीय आवास नियमों के तहत, लोकसभा सचिवालय ने सांसद को इस नए आवंटन को स्वीकार या अस्वीकार करने और अगले आठ दिनों के भीतर कब्जे से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी करने का निर्देश दिया है.
क्यों छिना बागी गुट का सबसे बड़ा ‘वार रूम’?
पार्थ भौमिक के इस बंगले से शिफ्ट होने का मतलब सीधा और साफ है कि टीएमसी दिल्ली में अपना बना-बनाया ठिकाना खोने जा रही है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड का यह बंगला टीएमसी के असंतुष्ट और बागी सांसदों का सबसे बड़ा वार रूम या ऑपरेशनल बेस हुआ करता था, जहां बैठकर पार्टी लाइन से अलग रणनीतियां बुनी जाती थीं. भौमिक के इस फैसले से बागी गुट के हाथ से दिल्ली की वो रणनीतिक जमीन खिसक गई है, जहां से वो अपनी सियासी गोटियां फिट करते थे.
क्या यह ‘घर वापसी’ है या किसी नए तूफान की आहट?
राजनीति में कोई भी कदम यूं ही नहीं उठाया जाता, खासकर तब जब मामला किसी बागी खेमे के बड़े चेहरे से जुड़ा हो. पार्थ भौमिक का लुटियंस दिल्ली के बड़े बंगले को छोड़कर फ्लैट में जाने का फैसला कई सवाल खड़े कर रहा है. क्या यह टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व के दबाव में उठाया गया कदम है, या बागी गुट कोई नई और गुप्त रणनीति तैयार कर रहा है जिसके लिए उन्हें इस पुराने दफ्तर की जरूरत नहीं रही? वजह जो भी हो, लेकिन इस एक सचिवालय आदेश ने यह साफ कर दिया है कि टीएमसी के भीतर की अंदरूनी जंग अब एक बेहद दिलचस्प और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है.
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Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें