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पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहे पलामू के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने एक बार फिर जिले और देश का गौरव बढ़ाया है. जो कि पांच दिवसीय नेपाल दौरे के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन विषय पर आयोजित सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया.
पलामू: पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहे पलामू के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने एक बार फिर जिले और देश का गौरव बढ़ाया है. अपने पांच दिवसीय नेपाल दौरे के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन विषय पर आयोजित सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया. इस अवसर पर उन्हें पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘प्राइड ऑफ एशिया अचीवर समिट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया. यह उनके जीवन का 85वां सम्मान है, जिनमें 11 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार शामिल हैं.
नेपाल के पोखरा और काठमांडू स्थित हेरिटेज गार्डन, ललितपुर में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ दोनों देशों के राष्ट्रगान, कन्या पूजन, पर्यावरण धर्म की प्रार्थना और पौधारोपण के साथ हुआ. कार्यक्रम का आयोजन नेपाल के केंद्रीय सहकारी अध्यक्ष सरोज कुमार शर्मा एवं कुलेश्वर विद्यालय के प्राचार्य मेघराज दुला के नेतृत्व में किया गया. मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. कौशल ने उपस्थित लोगों को पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्रों की शपथ दिलाई और प्रकृति संरक्षण को मानव जीवन का सबसे बड़ा दायित्व बताया.
वन राखी मूवमेंट से दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश
वन राखी मूवमेंट की स्वर्ण जयंती और पौधारोपण के 60 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर डॉ. कौशल ने छात्राओं के साथ वृक्षों पर रक्षासूत्र बांधकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया. खास बात यह रही कि जिन वृक्षों पर रक्षासूत्र बांधा गया, उनमें कई पौधे वर्ष 1980 में स्वयं उनके द्वारा लगाए गए थे. उन्होंने कहा कि कन्या पूजन धरती की रक्षा का और पौधा पूजन पूरे ब्रह्मांड के संरक्षण का प्रतीक है. उन्होंने लोगों से धार्मिक कर्तव्यों के साथ पर्यावरण धर्म को भी जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की.
पर्यावरण संरक्षण को बनाया जीवन का मिशन
डॉ. कौशल किशोर जायसवाल पिछले कई दशकों से पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं. उन्होंने लाखों पौधे लगाने, वन राखी अभियान को जन-आंदोलन बनाने, जलवायु परिवर्तन के प्रति लोगों को जागरूक करने और पर्यावरण धर्म की अवधारणा को देश-विदेश तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से उन्होंने हजारों लोगों को पौधारोपण और प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित किया. उनके प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक अभियान का स्वरूप मिला है, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सम्मान प्राप्त हुए हैं.
प्रदूषण को बताया दुनिया का सबसे बड़ा संकट
उन्होंने कहा कि डॉ. कौशल ने कहा कि वर्तमान समय में प्रदूषण पूरी दुनिया का सबसे बड़ा शत्रु बन चुका है। इसके कारण जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. यदि मानव जाति को सुरक्षित रखना है तो प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण को अपनी दिनचर्या और संस्कार का हिस्सा बनाना होगा. उन्होंने कहा कि सूर्य, जल, वृक्ष और प्रकृति के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है, इसलिए इनकी रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है.
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