भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

मक्के की फसल घुटने तक पहुंचते ही हो जाएं सतर्क, फॉल आर्मीवर्म...


होमताजा खबरकृषि

मक्के की फसल घुटने तक पहुंचते ही हो जाएं सतर्क, फॉल आर्मीवर्म कर सकता है अटैक

Last Updated:

Maize Crop Pest Prevention: मक्के की फसल को फॉल आर्मीवर्म कीट से काफी खतरा होता है. घुटने तक फसल पहुंचने पर इसकी निगरानी बहुत जरूरी है. इसी समय यह कीट फसल पर अटैक करता है और केवल 3-4 दिन में ही बेहद नुकसान पहुंचा सकता है.

ख़बरें फटाफट

पलामू. किसान खरीफ सीजन में बड़े पैमाने पर मक्के की खेती करते हैं. कम समय में बेहतर उत्पादन मिलने के कारण यह किसानों के लिए अच्छी आमदनी वाली प्रमुख फसल है. लेकिन मक्के की फसल जब तेजी से बढ़ते हुए घुटने तक पहुंचती है, तभी किसानों को सबसे ज्यादा सतर्क होने की जरूरत होती है. इस समय फॉल आर्मीवर्म नाम का खतरनाक कीट फसल पर हमला कर सकता है. अगर किसान तीन से चार दिन तक भी इस कीट के प्रकोप को नजरअंदाज कर दें, तो यह तेजी से फैलकर फसल को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.

आगे चलकर हो सकता है बड़ा नुकसान
पलामू स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, चियांकी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, फॉल आर्मीवर्म मक्के की शुरुआती और बढ़वार वाली अवस्था का बेहद नुकसानदायक कीट है. इसके लार्वा पौधे के ऊपरी हिस्से, नई पत्तियों और शिखर के बीच छिपकर पत्तियों को खाना शुरू कर देते हैं. धीरे-धीरे पत्तियों पर छेद, कटी हुई धारियां और नुकसान के निशान दिखाई देने लगते हैं. गंभीर प्रकोप होने पर यह पौधे के कोमल ऊपरी हिस्से को भी नुकसान पहुंचाता है, जिससे पौधे की बढ़वार रुक सकती है और आगे चलकर उत्पादन पूरी तरह नष्ट हो जाता है.

खेत की निगरानी बंद न करें
उन्होंने कहा कि किसानों को सबसे बड़ी गलती यह नहीं करनी चाहिए कि कीट के शुरुआती लक्षण दिखने के बाद भी वे खेत की निगरानी बंद कर दें. मक्के की फसल घुटने तक पहुंचते ही सुबह या शाम नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करें. खासकर पौधे के बीच वाले हिस्से और नई निकल रही पत्तियों को जरूर देखें. कीट का प्रकोप दिखते ही तुरंत दवा का इस्तेमाल करें. यह समस्या जब मक्के की फसल घुटने तक हो जाती है, तब होती है.

लेबल पर दी गई मात्रा के अनुसार करें प्रयोग
आगे कहा कि फॉल आर्मीवर्म के नियंत्रण के लिए क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल आधारित कीटनाशक, जैसे कोराजन, का प्रयोग किया जा सकता है. इसका उत्पाद के लेबल पर दी गई अनुशंसित मात्रा का ही उपयोग करें. कुछ परिस्थितियों में प्रति लीटर पानी में लगभग 0.6 से 1 मिलीलीटर तक दवा का इस्तेमाल कर सकते हैं. सही मात्रा फॉर्मूलेशन के अनुसार करें और इस तरह प्रयोग करें कि दवा पत्तियों के बीच और पौधे के शिखर तक पहुंचे.

सबसे प्रभावी तरीका
उन्होंने कहा कि समय पर सही कदम उठाने पर एक से दो दिन में कीट नियंत्रण का असर दिखाई देना शुरू हो सकता है. इसलिए मक्के की फसल को फॉल आर्मीवर्म के अटैक से बचाने के लिए ये तरीके अपना सकते हैं. नियमित निगरानी, शुरुआती पहचान और विशेषज्ञ की सलाह से समय पर छिड़काव ही आपकी फसल को बड़े नुकसान से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है.

About the Author

Raina Shukla

Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…

और पढ़ें



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top