Last Updated:
Gonda news: तालाब के पानी के रंग, गंध और मछलियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना जरूरी है. अगर मछलियां बार-बार पानी की सतह पर आकर मुंह खोलती दिखाई दें तो यह पानी में ऑक्सीजन की कमी का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेकर जरूरी कदम उठाने चाहिए. जरूरत के हिसाब से दें चारा: मछलियों को उनकी संख्या और आकार के अनुसार ही चारा देना चाहिए. जरूरत से ज्यादा चारा डालने पर बचा हुआ चारा पानी में सड़ सकता है, जिससे पानी की गुणवत्ता खराब होने का खतरा रहता है. इसलिए मछलियों की जरूरत के अनुसार ही चारा डालना बेहतर होता है.
गोंडा: ग्रामीण क्षेत्रों में मछली पालन किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बनता जा रहा है. लेकिन मछली पालन में अच्छी कमाई के लिए केवल तालाब में मछली डालना ही काफी नहीं है. इसके लिए तालाब की नियमित देखभाल और सही प्रबंधन भी जरूरी है. तालाब का पानी साफ और संतुलित रहने पर मछलियों की बढ़त अच्छी होती है और उत्पादन भी बेहतर मिल सकता है.
लोकल 18 से बातचीत के दौरान मत्स्य पालन एक्सपर्ट गुरुचरन निषाद बताते हैं कि तालाब में अनावश्यक घास, कचरा और जलीय खरपतवार को समय-समय पर हटाते रहना चाहिए. तालाब में अधिक गंदगी और खरपतवार होने से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिसका असर मछलियों की सेहत और बढ़त पर पड़ता है.
पानी की गुणवत्ता पर रखें नजर
तालाब के पानी के रंग, गंध और मछलियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना जरूरी है. अगर मछलियां बार-बार पानी की सतह पर आकर मुंह खोलती दिखाई दें तो यह पानी में ऑक्सीजन की कमी का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेकर जरूरी कदम उठाने चाहिए. जरूरत के हिसाब से दें चारा: मछलियों को उनकी संख्या और आकार के अनुसार ही चारा देना चाहिए. जरूरत से ज्यादा चारा डालने पर बचा हुआ चारा पानी में सड़ सकता है, जिससे पानी की गुणवत्ता खराब होने का खतरा रहता है. इसलिए मछलियों की जरूरत के अनुसार ही चारा डालना बेहतर होता है.
तालाब में क्षमता से ज्यादा मछली न डालें
तालाब में जरूरत से ज्यादा मछलियां डालने से भोजन और ऑक्सीजन के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है. इससे मछलियों की बढ़त प्रभावित हो सकती है. इसलिए तालाब के आकार और उसकी क्षमता के अनुसार ही मछलियों की संख्या तय करनी चाहिए. अगर मछलियां सुस्त दिखाई दें, किनारे के पास ज्यादा रहें या उनके शरीर पर किसी तरह के असामान्य निशान दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में तुरंत मत्स्य विभाग के अधिकारियों या विशेषज्ञ से सलाह लेकर उचित कदम उठाना चाहिए.
प्रबंधन से कम हो सकता है नुकसान
मत्स्य पालन में तालाब का सही प्रबंधन बेहद जरूरी है. पानी की गुणवत्ता, मछलियों की संख्या, चारे और साफ-सफाई पर नियमित नजर रखने से मछलियों की सेहत बेहतर रखने में मदद मिलती है. किसान समय-समय पर तालाब की स्थिति की निगरानी करें और किसी भी समस्या के लक्षण दिखाई देने पर विशेषज्ञ की सलाह लें, इससे नुकसान का खतरा कम किया जा सकता है.
About the Author
Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
और पढ़ें