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Poultry Farming: जिले के डोमचांच प्रखंड के मसनोडीह निवासी सुमन लाल मेहता आज ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं. कभी दूसरे राज्यों में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले सुमन ने गांव लौटकर स्वरोजगार का रास्ता चुना और मुर्गा पालन के व्यवसाय से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर ली. आज वह सभी खर्च निकालने के बाद हर महीने करीब एक लाख रुपये की आमदनी कर रहे हैं.
सुमन लाल मेहता बताते हैं कि पहले मजदूरी करने पर उन्हें हर महीने केवल 15 से 20 हजार रुपये की आय होती थी, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल था. इसी दौरान उन्होंने कृषि एवं पशुपालन विभाग द्वारा बरही के गौरियाकर्मा में आयोजित आठ दिवसीय मुर्गा पालन प्रशिक्षण में हिस्सा लिया. प्रशिक्षण से मिली जानकारी ने उन्हें इस व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रेरित किया.
प्रशिक्षण के बाद उन्होंने गांव की खाली जमीन पर करीब 15 हजार वर्ग फीट का शेड तैयार किया और व्यावसायिक स्तर पर मुर्गा पालन शुरू किया. वर्तमान में उनके शेड में लगभग 10 हजार मुर्गे तैयार हो रहे हैं.
उनके अनुसार एक चूजे को बाजार से करीब 35 रुपये में खरीदा जाता है और उसे तैयार होने में 35 से 40 दिनों का समय लगता है. इस दौरान मुर्गे के दाने, दवा और देखभाल सहित प्रति चूजा करीब 100 रुपये का खर्च आता है.
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तैयार होने पर एक मुर्गे का वजन एक किलो या उससे अधिक हो जाता है, जिसकी बिक्री करीब 110 रुपये प्रति किलो के हिसाब से होती है. खास बात यह है कि उन्हें बाजार में बिक्री के लिए भटकना नहीं पड़ता, बल्कि मुर्गी फार्म संचालक खुद उनके शेड पर आकर मुर्गे खरीदकर ले जाते हैं.
सुमन ने बताया कि सभी खर्चों को निकालने के बाद उन्हें प्रति मुर्गा लगभग 10 रुपये का शुद्ध लाभ होता है. इस हिसाब से 10 हजार मुर्गों के पालन पर उन्हें करीब एक लाख रुपये की मासिक आय होती है.
यह आमदनी उनके पुराने मजदूरी के काम से कई गुना अधिक है. उन्होंने युवाओं से अपील की कि रोजगार के लिए सिर्फ शहरों की ओर पलायन करने के बजाय सरकार की योजनाओं और प्रशिक्षण का लाभ उठाकर स्वरोजगार अपनाएं.