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Koderma 100 Year Old Temple: कोडरमा के खरियोडीह बाबा धाम मंदिर में सावन में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. उत्तरवाहिनी नदी के तट पर स्थित यह प्राचीन मंदिर मन्नत पूरी होने के लिए प्रसिद्ध है. कई श्रद्धालु तो दंडवत प्रणाम करते हुए मंदिर पहुंचते हैं.
कोडरमा. जिले के जयनगर प्रखंड स्थित खरियोडीह बाबा धाम मंदिर क्षेत्र के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है. सावन के पावन महीने में यहां भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. उत्तरवाहिनी नदी के तट पर स्थित इस प्राचीन मंदिर में मन्नत पूरी होने की मान्यता के कारण पूरे सावन भक्तों की भीड़ लगी रहती है.
मंदिर के पुजारी अजीत पांडेय ने विशेष बातचीत में बताया कि खरियोडीह बाबा धाम से जुड़ी आस्था की कहानी करीब एक सदी पुरानी है. उनके अनुसार, गांव के बद्री भगत को स्वप्न आया था कि उत्तरवाहिनी नदी के किनारे एक शिवलिंग पड़ा हुआ है. स्वप्न में उसे वहां से उठाकर विधि-विधान के साथ स्थापित करने का संकेत मिला था.
करीब 100 वर्ष पहले विधि-विधान से स्थापित किया गया था शिवलिंग
इसके बाद ग्रामीणों के बीच चर्चा और निर्णय हुआ. पुजारी अजीत पांडे के अनुसार, उनके दादा बैजनाथ पाण्डेय ने करीब 100 वर्ष पहले धार्मिक विधि-विधान के साथ उस शिवलिंग की मंदिर परिसर में स्थापना कराई थी. तभी से यह स्थान धीरे-धीरे ग्रामीणों और आसपास के लोगों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया.
अजीत पांडेय ने बताया कि यहां जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से भगवान शिव से मन्नत मांगते हैं, उनकी मनोकामना पूरी होने की मान्यता है. मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और संकल्प के अनुसार मंदिर में पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक कराते हैं.
मन्नत पूरी होने पर नदी से मंदिर तक कई श्रद्धालु करते हैं दंडवत
सावन में यहां आने वाले श्रद्धालुओं की भक्ति देखते ही बनती है. कई भक्त भगवान शिव को नारियल अर्पित करते हैं, तो कई श्रद्धालु उत्तरवाहिनी नदी में स्नान करने के बाद दंडवत प्रणाम करते हुए मंदिर तक पहुंचते हैं. इसके बाद भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना के लिए पूजा-अर्चना करते हैं.
खरियोडीह बाबा धाम मंदिर परिसर में भगवान शिव के शिवलिंग के अलावा माता पार्वती और भगवान हनुमान जी के मंदिर भी बने हुए हैं. सावन के दौरान श्रद्धालु भगवान शिव के साथ इन सभी देवी-देवताओं की भी पूजा करते हैं. धार्मिक वातावरण और श्रद्धालुओं की भीड़ से पूरा परिसर भक्तिमय बना रहता है.
मंदिर की छत आज भी है खुली, इसके पीछे भी जुड़ी है मान्यता
खरियोडीह बाबा धाम की एक खास विशेषता मंदिर के गर्भगृह के ऊपर का खुला हिस्सा है. जहां शिवलिंग स्थापित है, वहां मंदिर की छत पूरी तरह बंद नहीं है और ऊपर का हिस्सा खुला रखा गया है. पुजारी अजीत पांडे ने बताया कि मंदिर निर्माण के दौरान निर्माणकर्ता को स्वप्न आया था कि मंदिर के ऊपरी हिस्से को खुला रखा जाए. इसके बाद से मंदिर के इस हिस्से को कभी बंद करने का प्रयास नहीं किया गया. श्रद्धालुओं के लिए यह भी मंदिर की आस्था और परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है.
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Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…
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