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यह विवाद एक परिवार के मंदिर में प्रवेश को लेकर शुरू हुआ. स्थानीय पंचायत ने उस परिवार के मंदिर आने पर आपत्ति जताई थी, लेकिन परिवार ने इस प्रतिबंध का विरोध किया और मंदिर जाने पर अड़ा रहा. बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन मंदिर परिसर में धार्मिक कार्यक्रम और सामुदायिक भोज का आयोजन किया गया था. इसी दौरान पीड़ित परिवार के एक युवक ने मंदिर में प्रवेश पर रोक का विरोध किया.
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
महाराष्ट्र के उल्हासनगर से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां मंदिर में प्रवेश को लेकर हुए विवाद के बाद कुछ महिलाओं के साथ कथित तौर पर बेरहमी से मारपीट की गई, उनके कपड़े फाड़े गए, बाल काटे गए और उन्हें चप्पलों की माला पहनाकर सड़क पर घुमाया गया. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
पुलिस के मुताबिक, विवाद एक परिवार के मंदिर में प्रवेश को लेकर शुरू हुआ. स्थानीय पंचायत ने उस परिवार के मंदिर आने पर आपत्ति जताई थी, लेकिन परिवार ने इस प्रतिबंध का विरोध किया और मंदिर जाने पर अड़ा रहा. बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन मंदिर परिसर में धार्मिक कार्यक्रम और सामुदायिक भोज का आयोजन किया गया था. इसी दौरान पीड़ित परिवार के एक युवक ने मंदिर में प्रवेश पर रोक का विरोध किया. युवक का कहना था कि उसके परिवार ने कोई गलत काम नहीं किया है, इसलिए उन्हें मंदिर में जाने से नहीं रोका जा सकता. इसके बाद वह मंदिर परिसर में चला गया.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, युवक के मंदिर में जाने से वहां मौजूद दूसरे पक्ष के लोग भड़क गए. आरोप है कि बाद में कुछ लोगों ने पीड़ित परिवार के घर पर लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया. पहले परिवार के पुरुषों के साथ मारपीट की गई और फिर महिलाओं को निशाना बनाया गया.
आरोप है कि महिलाओं को घर से घसीटकर सड़क पर लाया गया, उनके कपड़े फाड़े गए, उन्हें अर्धनग्न किया गया और कैंची से उनके बाल काट दिए गए. इतना ही नहीं, महिलाओं को चप्पलों की माला पहनाकर करीब दो किलोमीटर तक सड़क पर घुमाया गया. आरोपियों ने रास्ते में कई लोगों को महिलाओं के पैर छूने के लिए भी मजबूर किया.
घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा. वीडियो में महिलाएं सड़क पर अपमानित होती नजर आ रही हैं जबकि आसपास लोग खड़े दिखाई दे रहे हैं. पुलिस का कहना है कि पीड़ित और आरोपी दोनों परिवार एक ही समुदाय से जुड़े हैं. बताया जा रहा है कि इससे पहले भी पीड़ित परिवार पर कुछ आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद कथित तौर पर उनका सामाजिक बहिष्कार किया गया था.
उल्हासनगर एसीपी शैलेश काले ने बताया कि इस मामले में सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है और अब तक दो महिलाओं को गिरफ्तार किया जा चुका है. पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच मंदिर में प्रवेश को लेकर विवाद था और दोनों परिवारों के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं.
वहीं पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया. परिवार का कहना है कि घटना महिलाओं की गरिमा और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन थी, लेकिन पुलिस ने पहले मामूली धाराओं में केस दर्ज किया. फिलहाल पुलिस मुख्य आरोपियों समेत फरार अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है.
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साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें