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मां की मजदूरी, बेटी का जुनून; मिट्टी के घर से पक्के सपनों...


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Divyani Linda Story : रांची के माझी परखर के चरदी गांव की अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी और भारतीय अंडर-17 महिला टीम की सदस्य दिव्यानी लिंडा की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल है. एक समय मिट्टी के घर में कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने वाली दिव्यानी आज अपने खेल के दम पर पहचान बना चुकी हैं.

मां की मजदूरी, बेटी का जुनून: मिट्टी से पक्के सपनों तक दिव्यानी की कहानीZoom

रांची के माझी परखर के चरदी गांव की अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी और भारतीय अंडर-17 महिला टीम की सदस्य दिव्यानी लिंडा की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल है.

रांची. झारखंड की रांची के माझी परखर के चरदी गांव की अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी और भारत की अंडर-17 महिला टीम की सदस्य दिव्यानी लिंडा आज सिर्फ खेल के मैदान में ही नहीं, बल्कि अपने संघर्ष और सफलता की कहानी से भी प्रेरणा बन गई हैं. कभी जिस घर में कठिनाइयों का बसेरा था, आज उसी घर के पास एक पक्का मकान बन रहा है, जो उनके सपनों की उड़ान का प्रतीक है.

दिव्यानी का बचपन एक मिट्टी के घर में बीता, जहां सुविधाओं की कमी और संघर्ष रोजमर्रा की हकीकत थी. बारिश के दिनों में छत टपकना और रात में डर के बीच समय बिताना आम बात थी. कई बार घर में सांप घुसने की घटनाओं ने परिवार को दहशत में रखा.

मां और दादी का संघर्ष

दिव्यानी के पिता का निधन चार साल पहले हो गया था. इसके बाद उनकी मां ने मजदूरी करके परिवार संभाला. दादी भी मेहनत कर घर चलाने में मदद करती हैं. कठिन परिस्थितियों के बावजूद परिवार ने हार नहीं मानी और दिव्यानी के सपनों को पंख देने में कोई कसर नहीं छोड़ी.





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