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Monsoon Cauliflower Farming Tips: मानसून में धान की जगह अगर गोभी की खेती करेंगे तो कम समय में बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं. हालांकि इसकी खेती के समय कुछ बातों का ध्यान रखना होता है. एक्सपर्ट की सलाह से गोभी उगाएं और बढ़िया आमदनी कमाएं.
देवघर. मानसून शुरू होते ही ज्यादातर किसान धान की खेती में जुट जाते हैं. लेकिन अगर कोई किसान इसी मौसम में सब्जी की खेती का सही दांव खेल ले, तो कम समय में अच्छी कमाई भी कर सकता है. बरसात के दिनों में कई सब्जियों की आवक कम हो जाती है, जिससे बाजार में उनकी कीमत तेजी से बढ़ जाती है. ऐसी ही एक सब्जी है गोभी, जिसकी मांग जुलाई और सावन के दौरान काफी बढ़ जाती है. कई मंडियों में अच्छी गुणवत्ता वाली एक-एक गोभी 100 रुपये या उससे अधिक कीमत पर भी बिक जाती है. लेकिन इसके लिए खेती भी वैज्ञानिक तरीके से करनी होगी, तभी अच्छी पैदावार और बढ़िया मुनाफा मिलेगा.
क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक
देवघर कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजन ओझा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि मानसून के मौसम में गोभी की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है. हालांकि, बरसात के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही पूरी फसल खराब कर सकती है. इसलिए शुरुआत से ही वैज्ञानिक तरीके अपनाना बेहद जरूरी है. सबसे पहले किसान अच्छी गुणवत्ता वाले बीज या पौधे का चयन करें. इसके लिए पूसा दीपाली और अर्ली कुंवारी जैसी उन्नत किस्में बेहतर मानी जाती हैं. अगर किसान सीधे बीज की बुवाई कर रहे हैं, तो बुवाई से पहले बीज का उपचार जरूर करें, ताकि शुरुआती अवस्था में पौधे रोगों से सुरक्षित रहें.
मानसून में बेड बनाकर करें खेती
उन्होंने बताया कि बरसात में खेत की तैयारी सबसे महत्वपूर्ण होती है. खेत में तीन से चार फीट चौड़ा बेड बनाना चाहिए और हर बेड के बीच करीब डेढ़ फीट चौड़ी नाली जरूर रखनी चाहिए. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बारिश का अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल जाएगा. मानसून में खेत में पानी जमा होने पर पौधों की जड़ें गलने लगती हैं और पूरी फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए जल निकासी की बेहतर व्यवस्था गोभी की खेती की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी मानी जाती है.
मल्चिंग शीट का करें इस्तेमाल
डॉ. ओझा ने बताया कि किसान अगर मल्चिंग शीट का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें और भी बेहतर परिणाम मिल सकते हैं. मल्चिंग लगाने से खेत में खरपतवार कम उगते हैं, मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है और पौधों की बढ़वार अच्छी होती है. मल्चिंग शीट में करीब डेढ़ फीट की दूरी पर छेद करें और एक बेड पर दो लाइन में पौधों की रोपाई करें. इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और उनकी बढ़वार भी बेहतर होती है.
रोपाई के बाद फफूंदनाशक दवा का करें प्रयोग
उन्होंने सलाह दी कि रोपाई के तुरंत बाद पौधों की जड़ों के पास फफूंदनाशक दवा, जैसे ‘साफ’, के साथ स्ट्रेप्टोसाइक्लिन का घोल डालना चाहिए. इससे पौधों में शुरुआती बीमारी का खतरा काफी कम हो जाता है और जड़ें मजबूत बनती हैं. समय-समय पर खेत की निगरानी करते रहें और बारिश के बाद कहीं भी पानी जमा न होने दें. अगर किसान इन सभी वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हैं, तो मानसून के मौसम में गोभी की शानदार पैदावार मिल सकती है. जब बाजार में इसकी कीमत ऊंची रहती है, तब किसान अच्छी आमदनी के साथ बेहतर मुनाफा भी कमा सकते हैं.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें