भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

Al Nino Effect Electricity Alert: तो क्या ठप हो जाएगी बिजली, अल...


नई दिल्ली: मानसून भले ही इस समय देश में किसानों से लेकर आम आदमी को राहत दे रहा है. हालांकि अब मानसून राहत से ज्यादा आफत बन गया है. लेकिन इससे पहले अल नीनो के कारण मानसून ने खूब तरसाया था. यहां तक कि वैज्ञानिकों ने सूखे की भी चेतावनी दे दी थी. लेकिन अब मौसम वैज्ञानिकों की नजर अब एक ऐसे खतरे पर टिकी है जो आने वाले महीनों में बिजली व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा बन सकता है. यह खतरा है अल नीनो (El Niño) का. अगर अल नीनो का असर बढ़ता है और बारिश सामान्य से कम होती है, तो सबसे पहले असर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स पर पड़ेगा. नदियों और बांधों में पानी कम होगा तो हाइड्रो पावर उत्पादन घटेगा. दूसरी ओर तेज हवाओं में कमी आने पर विंड एनर्जी भी प्रभावित हो सकती है. ऐसे हालात में देश की बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ना तय माना जा रहा है. यही वजह है कि केंद्र सरकार ने संभावित संकट का इंतजार करने के बजाय पहले से तैयारी शुरू कर दी है. पावर मंत्रालय ने सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समीक्षा बैठक कर साफ संकेत दे दिया है कि बिजली आपूर्ति किसी भी कीमत पर बाधित नहीं होने दी जाएगी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बिजली केवल घरों की जरूरत नहीं है. उद्योग, खेती, अस्पताल, रेलवे और डिजिटल अर्थव्यवस्था भी इसी पर निर्भर है. इसलिए मौसम में बदलाव अब सिर्फ मौसम विभाग की चिंता नहीं रह गया, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है. प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की समीक्षा बैठक के बाद अब बिजली मंत्रालय एक विस्तृत एडवाइजरी जारी करने की तैयारी में है. इसमें राज्यों, बिजली कंपनियों, ट्रांसमिशन एजेंसियों और थर्मल पावर प्लांट्स के लिए कई अहम निर्देश शामिल होंगे, ताकि अगर अल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ता है तो भी देश में बिजली संकट पैदा न हो.

नदियों और बांधों में पानी कम होगा तो हाइड्रो पावर उत्पादन घटेगा. (फाइल फोटो PTI)

अल नीनो के खतरे पर सरकार की बड़ी तैयारी

  • संभावित बिजली संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने पावर सेक्टर के सभी प्रमुख अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की है. इस बैठक में बिजली सचिव, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अध्यक्ष, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर और ट्रांसमिशन सेक्टर से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे. बैठक का मकसद यह था कि यदि अल नीनो के कारण मौसम सामान्य से अधिक प्रभावित होता है तो बिजली उत्पादन और आपूर्ति को कैसे सुरक्षित रखा जाए.
  • पावर मंत्रालय के मुताबिक जल्द जारी होने वाली एडवाइजरी में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण से जुड़े कई एहतियाती उपाय शामिल होंगे. अधिकारियों के अनुसार सरकार चाहती है कि संभावित संकट आने से पहले ही सभी एजेंसियां अपनी तैयारी पूरी कर लें.
  • बिजली मंत्रालय की समीक्षा बैठक ऐसे समय हुई है जब प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी अल नीनो के संभावित प्रभावों की समीक्षा की है. पीएमओ ने निर्देश दिया है कि मानसून और विलंबित बारिश के असर पर लगातार नजर रखी जाए तथा राज्यों के साथ समन्वय बनाकर जरूरत पड़ने पर तुरंत राहत उपाय लागू किए जाएं.

थर्मल पावर प्लांट्स को मिलेगा बड़ा जिम्मा

यदि बारिश सामान्य से कम होती है तो सबसे अधिक जिम्मेदारी कोयला आधारित बिजलीघरों पर आ जाएगी. इसलिए मंत्रालय थर्मल पावर प्लांट्स को पर्याप्त कोयला भंडारण बनाए रखने और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश देने की तैयारी कर रहा है. राज्य सरकारों से भी जरूरत पड़ने पर जल उपलब्ध कराने में सहयोग मांगा जा सकता है. इसके अलावा सभी बिजलीघरों को समय रहते मशीनों की मेंटेनेंस पूरी करने को कहा जाएगा ताकि मांग बढ़ने पर तकनीकी खराबी के कारण उत्पादन प्रभावित न हो.

ट्रांसमिशन नेटवर्क पर भी विशेष निगरानी

सरकार केवल बिजली उत्पादन पर ही नहीं बल्कि ट्रांसमिशन सिस्टम पर भी फोकस कर रही है. एडवाइजरी में उन ट्रांसमिशन लाइनों, ट्रांसफॉर्मरों और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों की पहचान करने को कहा जाएगा, जिन पर अधिक लोड पड़ सकता है. इन संवेदनशील नेटवर्क की पहले से मरम्मत और निगरानी करने से बड़े पैमाने पर बिजली बाधित होने की आशंका कम होगी.

सोलर एनर्जी का बढ़ेगा इस्तेमाल

मंत्रालय राज्यों को कृषि क्षेत्र की बिजली मांग को दिन के समय शिफ्ट करने की सलाह भी दे सकता है. इसका उद्देश्य दिन में उपलब्ध सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग करना है. अगर खेत में पानी के लिए लगा पंप दिन के समय चलेंगे तो सोलर पावर का बेहतर इस्तेमाल होगा और शाम के समय बिजली ग्रिड पर दबाव कम रहेगा. इससे कोयले पर निर्भरता भी कुछ हद तक घटाई जा सकेगी.

हाइड्रो और विंड सेक्टर पर सबसे ज्यादा खतरा

एक्सपर्ट की चिंता इस बात को लेकर है कि यदि अल नीनो के कारण मानसून कमजोर रहता है तो सबसे पहले हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स का उत्पादन घटेगा. बांधों में जलस्तर कम होने से बिजली उत्पादन प्रभावित होगा. इसके साथ ही हवा की गति में कमी आने से विंड एनर्जी उत्पादन भी घट सकता है. ऐसे में देश की बिजली जरूरत पूरी करने के लिए कोयला आधारित बिजलीघरों पर अतिरिक्त निर्भरता बढ़ सकती है.

क्या अल नीनो आने का मतलब देश में निश्चित रूप से बिजली संकट होगा?

नहीं. अल नीनो का मतलब यह नहीं कि बिजली संकट तय है. इसका अर्थ केवल इतना है कि सामान्य से कम बारिश और मौसम में असामान्य बदलाव की संभावना बढ़ जाती है. यदि समय रहते कोयला भंडारण, जल प्रबंधन, ट्रांसमिशन नेटवर्क और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तैयारी पूरी कर ली जाए तो बिजली आपूर्ति सामान्य रखी जा सकती है. इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार पहले से तैयारी कर रही है.

सरकार किन उपायों से बिजली कटौती रोकना चाहती है?

सरकार थर्मल पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला स्टॉक, जल उपलब्धता, मशीनों की समय पर मरम्मत, संवेदनशील ट्रांसमिशन नेटवर्क की निगरानी और सोलर ऊर्जा के अधिक उपयोग पर जोर दे रही है. राज्यों को भी बिजली मांग का बेहतर प्रबंधन करने की सलाह दी जाएगी ताकि किसी भी स्थिति में बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट जैसी नौबत न आए.

आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ सकता है?

यदि मौसम सामान्य रहता है तो आम लोगों को किसी अतिरिक्त परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. लेकिन यदि बारिश में भारी कमी आती है और बिजली उत्पादन प्रभावित होता है, तो उद्योगों, कृषि और बड़े शहरों में बिजली की मांग बढ़ सकती है. ऐसे समय सरकार की पहले से की गई तैयारी ही तय करेगी कि बिजली आपूर्ति कितनी सुचारु बनी रहती है. फिलहाल सरकार का फोकस यही है कि उपभोक्ताओं पर न्यूनतम असर पड़े.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top