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मारांग बुरु महासम्मेलन में उमड़ा आदिवासी समाज का जनसैलाब:मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने...




गिरिडी के मधुबन में मारांग बुरु संघर्ष समिति की ओर से आयोजित दो दिवसीय मारांग बुरु धोरोमगाढ़ महासम्मेलन में गुरुवार को हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग जुटे। पारसनाथ पहाड़ स्थित मारांग बुरु दिशोम मांझीथान में आयोजित इस महासम्मेलन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी एवं गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के साथ शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने संथाली और हिंदी दोनों भाषाओं में लोगों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने आदिवासी समाज की एकजुटता, सामाजिक और आर्थिक विकास, शिक्षा तथा रोजगार के मुद्दों पर अपनी बात रखी। साथ ही दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और झारखंड आंदोलन के अगुवा दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भी याद किया। गुरुवार को सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम आयोजित हुआ
महासम्मेलन का आयोजन मारांग बुरु की सुरक्षा, संरक्षण और क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग को लेकर किया गया है। बुधवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मारांग बुरु दिशोम मांझीथान में पूजा-अर्चना और धर्म ध्वज फहराकर दो दिवसीय महासम्मेलन का विधिवत शुभारंभ किया गया था। गुरुवार को मुख्यमंत्री की उपस्थिति में सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे आदिवासी समाज के लोगों ने भाग लिया। अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज सामाजिक और आर्थिक रूप से भले ही कमजोर हो, लेकिन उसके अंदर आत्मविश्वास की कोई कमी नहीं है। मारांग बुरु आदिवासी समाज की आस्था, संस्कृति और पहचान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि समाज में कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और समझदारी के बल पर आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति बनाई है। इसलिए समाज के लोगों को अपनी क्षमता पहचानते हुए आगे बढ़ने की जरूरत है। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना भी जरूरी पढ़े-लिखे युवाओं की ओर से नौकरी नहीं मिलने की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या सरकार सभी लोगों को नौकरी दे सकती है? यह संभव नहीं है। उन्होंने युवाओं को रोजगार के अन्य विकल्पों और स्वरोजगार की दिशा में भी प्रयास करने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के विकास के लिए शिक्षा के साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना भी जरूरी है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू को याद करते हुए कहा कि वह झारखंड मुक्ति मोर्चा के ईमानदार नेता थे। जनता ने उन्हें विधायक बनाया और फिर मंत्री के रूप में काम करने का अवसर दिया। उन्होंने दिशोम गुरु शिबू सोरेन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने आदिवासी समाज को एकजुट रखने का काम किया। आज उसी एकजुटता का परिणाम है कि आदिवासी समाज के लोग सरकार में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। आदिवासियों को भी संविधान के तहत कई अधिकार प्राप्त
वहीं, मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निश्चित रूप से एक सामाजिक कार्यक्रम है। आदिवासी समाज ने अपने अधिकारों और सामाजिक उत्थान के उद्देश्य से इस महासम्मेलन का आयोजन किया है। आदिवासियों को भी संविधान के तहत कई अधिकार प्राप्त हैं। देश में ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां आदिवासियों की अनुमति के बिना एक कदम भी आगे बढ़ाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज आज अपने विकास के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास कर रहा है। मुख्यमंत्री ने समाज के लोगों से अपनी एकजुटता बनाए रखने और शिक्षा, रोजगार तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता के माध्यम से आगे बढ़ने की अपील की। महासम्मेलन के माध्यम से मारांग बुरु की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान की रक्षा के साथ आदिवासी समाज के अधिकारों और संरक्षण से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया।



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