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कहा- समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराएं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य में इस बार कम बारिश हो रही है। इसलिए सुखाड़ को देखते हुए योजनाएं तैयार करें। वहीं पलामू प्रमंडल में हर साल सुखाड़ जैसी स्थिति बनी रहती है, जिससे धान की खेती कम हो पाती है। इसलिए पलामू सहित कम बारिश वाले जिलों में किसानों को दलहन व मिलेट फसलों के लिए प्रोत्साहित करें। किसानों को कम पानी में उपज होने वाली खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने जैविक खेती, व्यावसायिक खेती और जल संरक्षण आधारित कृषि पद्धति को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री शुक्रवार को कृषि, पशुपालन और सहकारिता विभाग की बैठक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर खाद-बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। किसानों की समृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए सभी योजनाओं का लाभ तय समय पर किसानों तक पहुंचना चाहिए। यही नहीं, योजनाओं की लगातार मॉनिटरिंग करें और समय-समय पर समीक्षा करें, ताकि योजनाओं की अपडेट जानकारी उपलब्ध हो। हर जिले में खुलेगी मॉडल किसान पाठशाला
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के हर जिले में एक-एक मॉडल किसान पाठशाला खुलेगी। उन्होंने अधिकारियों को इस योजना को जल्द धरातल पर उतारने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि खेती अब केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रह सकती। किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत कृषि पद्धति और वैज्ञानिक तरीकों से जोड़ना समय की जरूरत है। किसान पाठशाला किसानों के लिए प्रशिक्षण और नई तकनीक की जानकारी का केंद्र बनेगी। इससे किसान कम लागत में अधिक उत्पादन करने में सक्षम होंगे। उन्होंने गढ़वा के भवनाथपुर स्थित किसान पाठशाला के परियोजना प्रबंधक प्रदीप कुमार सैनी से वीडियो कॉल पर बात की और वहां के कार्यों का जायजा लिया। किसान समृद्धि योजना में ढिलाई बर्दाश्त नहीं, सोलर पंप जल्द दें
मुख्यमंत्री ने किसान समृद्धि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य खेतों की सिंचाई के लिए किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराना है। इससे सिंचाई पर होने वाला खर्च कम होगा और डीजल व बिजली पर निर्भरता घटेगी। सरकार का लक्ष्य खेती की लागत को कम कर किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। जब खेती की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ेगा, तभी किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने किसान समृद्धि योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने पर जोर देते हुए कहा कि इसमें किसी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। इसलिए योजना की नियमित निगरानी और समय-समय पर समीक्षा करें। इधर, मानसून की बेरूखी से राज्य में धान की खेती का हाल
इस बार 18 लाख हेक्टेयर खेती का लक्ष्य; 15 जुलाई तक सिर्फ 13.14% धान की खेती, फिर भी पिछले साल से 3.53% ज्यादा झारखंड में मानसून की बेरुखी का असर धान की खेती पर दिख रहा है। राज्य में कुल 18 लाख हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन 15 जुलाई तक सिर्फ 236.70 हेक्टेयर में ही धान की बिजाई और रोपाई हो पाई है। यह लक्ष्य का 13.14% है। पिछले साल इस अवधि में लक्ष्य का 9.61% (172 हेक्टेयर) में ही धान की खेती हो पाई थी। इस बार हालात ऐसे हैं कि कुछ जिलों में अभी खेती शुरू भी नहीं हो पाई है। {कुछ जिलों में अब तक खेती शुरू भी नहीं हो पाई है।
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