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मुनीर-शहबाज की अब उल्टी गिनती शुरू, भारत का बेटा आतंकियों की हवा...


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कौन हैं विवके अग्रवाल, बने FATF के डिप्टी चीफ, कैसे मुनीर-शहबाज पर आई मुसीबत?

Agency:एजेंसियां

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Who is Vivek Agarwal: टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली संख्या फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठक में भारत के वरिष्ठ अधिकारी विवेक अग्रवाल को वर्ष 2026-27 के लिए संगठन का अगला उपाध्यक्ष चुना गया है. विदेश मंत्रालय ने इसे भारत की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर आगे बढ़ रहे देश के लिए यह एक महत्वपूर्ण क्षण है. मंत्रालय के अनुसार एफएटीएफ में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका वैश्विक आतंकी वित्तपोषण नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत करेगी.

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भारत के वरिष्ठ अधिकारी विवेक अग्रवाल को एफएटीएफ का अगला उपाध्यक्ष चुना गया है.

आतंकियों के सरपरस्त पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज मुनीर की रातों की नींद छीनने वाली खबर आई है. आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत को एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता मिली है. टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली संख्या फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठक में भारत के वरिष्ठ अधिकारी विवेक अग्रवाल को वर्ष 2026-27 के लिए संगठन का अगला उपाध्यक्ष चुना गया है. ऐसे समय में जब भारत लगातार पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और आतंकियों की फंडिंग के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा रहा है, एफएटीएफ में भारतीय प्रतिनिधि का इस अहम पद तक पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

विदेश मंत्रालय ने इसे भारत की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर आगे बढ़ रहे देश के लिए यह एक महत्वपूर्ण क्षण है. मंत्रालय के अनुसार एफएटीएफ में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका वैश्विक आतंकी वित्तपोषण नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत करेगी.

आखिर एफएटीएफ इतना अहम क्यों है?

एफएटीएफ दुनिया की सबसे प्रभावशाली वित्तीय निगरानी संस्थाओं में से एक है. यह संगठन मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के लिए धन जुटाने और अवैध वित्तीय नेटवर्क पर नजर रखता है. किसी भी देश को एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट या ब्लैक लिस्ट में डालना उसकी अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय छवि पर बड़ा असर डाल सकता है.

पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान कई बार एफएटीएफ की निगरानी और कार्रवाई का सामना कर चुका है. भारत लगातार पाकिस्तान की धरती से संचालित आतंकी संगठनों और उनकी फंडिंग के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की मांग करता रहा है. ऐसे में एफएटीएफ के शीर्ष नेतृत्व में भारत की मौजूदगी को नई दिल्ली की बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है.

कौन हैं विवेक अग्रवाल?

विवेक अग्रवाल फिलहाल भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय में सचिव के पद पर तैनात हैं. इससे पहले वे एफएटीएफ में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख रह चुके हैं. साथ ही वे FIU-IND (Financial Intelligence Unit-India) के निदेशक के रूप में भी काम कर चुके हैं, जहां उनकी जिम्मेदारी संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की निगरानी करना था.

वित्तीय अपराधों, आतंकवाद की फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निगरानी तंत्र को लेकर उनका अनुभव काफी व्यापक माना जाता है. यही वजह है कि एफएटीएफ के सदस्य देशों ने उन्हें उपाध्यक्ष पद के लिए चुना.

ब्रिटेन के अधिकारी की जगह संभालेंगे जिम्मेदारी

विवेक अग्रवाल एफएटीएफ के मौजूदा उपाध्यक्ष गाइल्स थॉमसन का स्थान लेंगे, जो यूनाइटेड किंगडम से हैं. वह जुलाई 2026 से इस नई जिम्मेदारी को संभालेंगे और संगठन की नीतियों, समीक्षा प्रक्रियाओं और वैश्विक वित्तीय निगरानी अभियानों में अहम भूमिका निभाएंगे.

भारत के लिए क्यों खास है यह नियुक्ति?

एफएटीएफ में भारत की मजबूत उपस्थिति आतंकवाद को आर्थिक मदद पहुंचाने वाले नेटवर्क पर शिकंजा कसने में मदद करेगी. भारत लंबे समय से यह कहता रहा है कि आतंकवाद और उसकी फंडिंग को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता. एफएटीएफ में नेतृत्वकारी भूमिका मिलने से भारत को इस मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर अपनी बात और मजबूती से रखने का अवसर मिलेगा.

विदेश मंत्रालय ने कहा कि विवेक अग्रवाल का अनुभव एफएटीएफ के उस मिशन को आगे बढ़ाने में मदद करेगा, जिसका उद्देश्य वैश्विक वित्तीय प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है. भारत के लिए यह सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर बढ़ते प्रभाव का संकेत भी है.

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Saad Omar

साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें



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