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यह है झारखंड का सबसे विषैला सांप, चुपके से करता है शिकार,...


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Jharkhand Most Venomous Snake: झारखंड में कई तरह के सांप निकलते हैं जिनके काटने से हर साल बहुत लोगों की मौत होती है. पर बात सबसे खतरनाक सांप की हो तो एक्सपर्ट इस प्रजाति का नाम लेते हैं. इसकी सबसे खराब बात यह है कि कई बार काटने पर पता भी नहीं चलता और मौत हो जाती है.

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पलामू. झारखंड का इलाका जंगल-पहाड़ों से घिरा हुआ है. जहां जंगलों और ग्रामीण इलाकों में सांपों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें कुछ पूरी तरह विषहीन होते हैं, जबकि कुछ बहुत विषैले होते हैं. प्रकृति ने जीवों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए खाद्य श्रृंखला विकसित की है, जिसमें बड़े विषैले सांप छोटे सांपों और अन्य जीवों की संख्या को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. झारखंड में प्रमुख रूप से कोबरा, करैत और वाइपर प्रजाति के सांप पाए जाते हैं, जिनके काटने से अगर समय पर इलाज नहीं मिला तो हर वर्ष कई लोगों की जान चली जाती है.

सबसे अधिक मौतें करैत के काटने से
सर्प विशेषज्ञ डॉ. डी. एस. श्रीवास्तव ने लोकल18 को बताया कि झारखंड में मोनोकल्ड कोबरा (Monocled Cobra) और बाइनोकल्ड या बाई-ऑसेलेट कोबरा जैसी प्रजातियां मिलती हैं. कोबरा अपने फन के कारण आसानी से पहचाना जाता है. इसका विष तंत्रिका तंत्र (न्यूरोटॉक्सिक) पर असर करता है, जिससे शरीर की नसें प्रभावित होती हैं और समय पर इलाज नहीं मिलने पर सांस लेने में दिक्कत हो सकती है. झारखंड में सबसे अधिक मौतें कोबरा से नहीं, बल्कि करैत के काटने से होती हैं.

कई बार पता भी नहीं चलता कि काटा है
उन्होंने कहा कि करैत को झारखंड का सबसे खतरनाक सांप माना जाता है. इसकी खासियत यह है कि यह अक्सर रात में सक्रिय रहता है और बिना फन फैलाए या चेतावनी दिए सीधे काट लेता है. कई बार काटने के समय दर्द भी बहुत कम होता है, जिससे पीड़ित को इसका पता देर से चलता है. करैत का विष भी न्यूरोटॉक्सिक होता है, जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर श्वसन क्रिया को बंद कर सकता है. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में करैत के काटने से मौत के मामले अधिक सामने आते हैं.

झाड़-फूंक के चक्कर में न रहें
इसके अलावा झारखंड में रसेल्स वाइपर (Russell’s Viper), जिसे कई क्षेत्रों में बहिरा सांप भी कहा जाता है, और ग्रीन पिट वाइपर जैसी प्रजातियां भी मिलती हैं. वाइपर का विष रक्त और रक्त कोशिकाओं पर हमला करता है. इसे हीमोटॉक्सिक विष कहा जाता है, जो खून के थक्के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है और आंतरिक रक्तस्राव जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है.

एक्सपर्ट ने कहा कि सांप काटने पर झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे बिल्कुल न रहें. पीड़ित को शांत रखें, प्रभावित अंग को कम से कम हिलाएं और बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं, जहां एंटी-स्नेक वेनम (ASV) उपलब्ध हो. समय पर उपचार मिलने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है. जागरूकता, सावधानी और त्वरित चिकित्सा ही सांप के जहर से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है.

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Raina Shukla

Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…

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