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Deoghar News: झारखंड के देवघर जिले के लिए केंद्र सरकार की तरफ से एक साथ दो बड़ी खुशखबरी आई है जो प्रदेश के युवाओं के भविष्य और स्वास्थ्य सुरक्षा की पूरी तस्वीर बदल कर रख देगी. इन दोनों प्रोजेक्ट्स से जहां 10 हजार युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा मिलेगी, वहीं चार राज्यों के मरीजों को महामारी से सुरक्षा का कवच मिलेगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फाइल फोटो)
देवघर. झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी देवघर अब तकनीकी शिक्षा और उन्नत चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में एक बड़े केंद्र के रूप में उभरने जा रही है. केंद्र सरकार ने देवघर के विकास को रफ्तार देते हुए दो बेहद महत्वपूर्ण परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है. इसके तहत एक तरफ जहां जसीडीह स्थित सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क (STPI) में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (नाइलेट) का एडवांस सेंटर खुलेगा, वहीं दूसरी तरफ देवघर एम्स में अत्याधुनिक वायरस रिसर्च केंद्र (BSL-3 लैब) की स्थापना की जाएगी. इन दोनों प्रोजेक्ट्स से क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार और स्वास्थ्य सुरक्षा के नए रास्ते खुलेंगे.
20 करोड़ की लागत से बनेगा नाइलेट का एडवांस सेंटर
देवघर को डबल सौगात की पहली कड़ी में, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने देवघर के जसीडीह स्थित सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क (STPI) में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (नाइलेट) के एडवांस सेंटर को मंजूरी दी है. इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए 20 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया गया है. यह आधुनिक सेंटर 6460 वर्ग फीट के क्षेत्र में बनकर तैयार होगा. केंद्र सरकार ने इसके शुरुआती इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक लैब्स के निर्माण के लिए पहले चरण में 6 करोड़ रुपए की राशि जारी करने पर भी सहमति दे दी है. यह सेंटर सीधे तौर पर रांची एक्सटेंशन सेंटर के रूप में काम करेगा.
एआई और साइबर सिक्योरिटी की पढ़ाई, 10 हजार रोजगार
इस तकनीकी केंद्र की मदद से अगले पांच वर्षों में क्षेत्र के लगभग 10 हजार युवाओं को विश्वस्तरीय ट्रेनिंग दी जाएगी. वर्तमान समय की मांग को देखते हुए यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सिक्योरिटी जैसे आधुनिक कोर्स सिखाए जाएंगे. इसके अलावा छात्रों को सोलर टेक्नोलॉजी, एलईडी मैन्युफैक्चरिंग, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल रिपेयरिंग जैसे शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कोर्स भी कराए जाएंगे. योजना के मुताबिक शुरुआती तीन सालों में हर साल 400 से 500 बच्चों को ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसे आगे बढ़ाकर सालाना दो हजार छात्र किया जाएगा. इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए बड़े शहरों में नहीं भटकना पड़ेगा.
देवघर एम्स में चार राज्यों की पहली BSL-3 वायरस लैब
देवघर को दोहरी सौगात के दूसरे हिस्से में स्वास्थ्य के क्षेत्र में देवघर को बहुत बड़ी उपलब्धि मिली है. प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) के तहत देवघर एम्स में वायरस रिसर्च केंद्र (BSL-3 लैब) खोलने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. यह लैब बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के पूरे क्षेत्र की पहली बायो सेफ्टी लेवल 3 प्रयोगशाला होगी. केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के माध्यम से इसकी टेंडर प्रक्रिया अब अपने आखिरी चरण में पहुंच चुकी है. प्रशासन का लक्ष्य है कि इस आधुनिक लैब को इसी साल के भीतर पूरी तरह से चालू कर दिया जाए.
जानलेवा संक्रमणों पर रिसर्च और त्वरित जांच की सुविधा
इस अत्याधुनिक लैब के अंदर कोविड-19, एवियन इन्फ्लुएन्जा (बर्ड फ्लू) और मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (MDR-TB) जैसे हवा से फैलने वाले बेहद खतरनाक और जानलेवा संक्रमणों पर वैज्ञानिक रिसर्च की जाएगी. जैविक कचरे और घातक वायरस को बाहर फैलने से रोकने के लिए इस पूरी लैब को पूरी तरह से सील और एयरटाइट वातावरण में तैयार किया जा रहा है. त्वरित जांच के लिए इसमें ‘रियल टाइम पीसीआर’ और आधुनिक निगरानी प्रणालियां लगाई जाएंगी. अब तक इन गंभीर बीमारियों की जांच के लिए सैंपल दिल्ली या अन्य बड़े महानगरों में भेजने पड़ते थे, जिससे समय की बर्बादी होती थी. अब देवघर एम्स में ही यह जांच बेहद कम समय में हो सकेगी.
देवघर बनेगा मेडिकल और टेक हब
इन दोनों बड़ी परियोजनाओं की मंजूरी मिलने से साहेबगंज, गोड्डा, दुमका सहित पूरे संथाल परगना और पड़ोसी राज्य बिहार के सीमावर्ती जिलों को सीधा फायदा पहुंचेगा. ऐसे में देवघर अब न सिर्फ बाबा नगरी के रूप में जाना जाएगा, बल्कि पूर्वी भारत में तकनीकी शिक्षा और आधुनिक चिकित्सा के सबसे प्रमुख केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित करेगा. स्पष्ट है कि बढ़ते तकनीकी निवेश और एम्स में उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं के इस दोहरे तालमेल से देवघर आने वाले दिनों में देश के चुनिंदा एजुकेशन और मेडिकल हब की सूची में शामिल होने के लिए तैयार है.
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