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सुल्तानपुर में 300 साल पुराना नागेश्वर धाम मंदिर, सावन में श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र है. यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है, खासकर विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं. सुल्तानपुर शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित है, यह मंदिर सावन के महीने में श्रद्धालुओं के जलाभिषेक का एक प्रमुख धार्मिक केंद्र होता है. अगर आप सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ के किसी मंदिर में जल चढ़ाने की सोच रहे हैं और आपको सुल्तानपुर आना है तो यह मंदिर आपके मनोकामनाओं को पूरा कर सकता है.
सुल्तानपुरः भारत प्राचीन काल सही धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं वाला देश रहा है. यहां पर कई ऐसे धार्मिक स्थल है, जहां पर लोगों की गहरी आस्था जुडी हुई है. इस तरह एक भगवान शंकर का मंदिर यूपी के सुल्तानपुर जिले में भी है. जो सुल्तानपुर शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित है, यह मंदिर सावन के महीने में श्रद्धालुओं के जलाभिषेक का एक प्रमुख धार्मिक केंद्र होता है. अगर आप सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ के किसी मंदिर में जल चढ़ाने की सोच रहे हैं और आपको सुल्तानपुर आना है तो यह मंदिर आपके मनोकामनाओं को पूरा कर सकता है.
300 वर्ष पुराना है मंदिर
ग्रामीण राजेश कुमार तिवारी ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि नागेश्वर धाम मंदिर का इतिहास करीब 300 वर्ष पुराना माना जाता है. उनके अनुसार यह मंदिर उनके दादा-परदादाओं के समय से इसी स्वरूप में स्थापित है. महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां अवश्य सुनी जाती है. कई श्रद्धालुओं का अनुभव है कि विवाह में आ रही बाधाएं भी बाबा नागेश्वरनाथ के दर्शन और मन्नत मांगने के बाद दूर हो गईं और उनकी मनोकामनाएं पूरी हुईं.
जिसकी शादी नहीं होती है वह मांगते हैं मन्नत
यह मंदिर सुल्तानपुर शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर समरथपुर गांव में स्थित है. जिसे नागेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है. इस मंदिर के पुजारी इंद्र देव आचार्य लोकल 18 से बताते हैं कि इस मंदिर की यह मान्यता है कि यहां पर जिन लोगों की शादी नहीं हो पाती वह लोग अगर मन्नत मिलते हैं तो भगवान नागेश्वर उनकी मन्नत को पूरा करते हैं अभी तक कई ऐसे लोगों का विवाह यहां की मन्नत मांगने के बाद हो चुका है. अगर आप भी इस मंदिर तक पहुंचाना चाहते हैं तो आपको सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर धनपतगंज ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गांव समरथपुर होगा. यहां पर आपको यह मंदिर एक भव्य तालाब के किनारे मिल जाएगा. यहां पर कई ऐसे पेड़ हैं जो इस मंदिर को और प्राकृतिक बनाते हैं और यहां का वातावरण भी काफी पॉजिटिव रहता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …
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