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रांची यूनिवर्सिटी में भी परीक्षा संबंधी कार्यों के नाम पर आउटसोर्सिंग एजेंसी को 18% जीएसटी के साथ अब तक करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया है। विशेष ऑडिट की आपत्ति के बाद विवि ने स्वीकार किया है कि 2022 से अब तक आउटसोर्सिंग एजेंसी एनसीसीएफ को किए गए सभी भुगतानों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही जीएसटी मद में दी गई राशि की रिकवरी की जाएगी। इतना ही नहीं 8 जुलाई 2026 को जारी करीब 3.60 करोड़ रुपए के भुगतान को भी रोकने की कवायद शुरू कर दी गई है। विश्वविद्यालय ने एजेंसी से कहा है कि यदि चेक अभी बैंक में क्लियर नहीं हुआ है तो उसे वापस किया जाए। यह मामला इसलिए भी बड़ा है क्योंकि चार वर्षों से परीक्षा कार्यों पर दिए गए जीएसटी की रिकवरी के लिए कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
भर पहले 3.60 करोड़ का भुगतान भी घेरे में : रांची विश्वविद्यालय प्रशासन ने 8 जुलाई को आउटसोर्सिंग एजेंसी को करीब 3.60 करोड़ रुपए का भुगतान जारी किया। इस भुगतान में भी 18% जीएसटी शामिल है। विश्वविद्यालय ने इसे तुरंत वापस करने को कहा है। एनपीयू से शुरू हुई कहानी रांची विश्वविद्यालय पहुंची
नीलांबर-पीतांबर विवि में सबसे पहले विशेष विशेष ऑडिट के दौरान परीक्षा संबंधी कार्यों पर जीएसटी भुगतान को लेकर सवाल उठाया गया। इसे दैनिक भास्कर में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। इसके बाद आरयू प्रशासन ने भुगतान की फाइलें निकालकर हिसाब-किताब शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में विनोबा भावे विवि समेत अन्य विवि में पहुंचना तय है। उठ रहे कई सवाल
चार वर्षों तक नियमों की सही व्याख्या क्यों नहीं हुई?
भुगतान से पहले वित्त और लेखा शाखा ने कानूनी राय ली थी या नहीं?
यदि जीएसटी देय नहीं था तो एजेंसी ने टैक्स क्यों जोड़ा?
जीएसटी की वापसी कैसे होगी? भुगतान का आकलन किया जा रहा…
अबतक जीएसटी मद में जितनी राशि का भुगतान हुआ है, उसका आकलन किया जा रहा है। नियम के अनुसार जो राशि वापस ली जा सकती है, उसकी वसूली की जाएगी। 8 जुलाई को जारी चेक को भी वापस कराने के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी को कहा गया है। – डॉ स्मृति सिंह, पीआरओ आरयू
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