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राहुल गांधी संग अभिषेक बनर्जी की डेढ़ घंटे सीक्रेट मीटिंग, कुंद होगी...


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राहुल संग अभिषेक की डेढ़ घंटे सीक्रेट मीटिंग, कुंद होगी TMC में बगावत की धार!

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी की डेढ़ घंटे तक चली मुलाकात में इंडिया गठबंधन, बंगाल में कांग्रेस TMC तालमेल और TMC की अंदरूनी बगावत पर चर्चा होने की खबर है. इस बीच माना जा रहा है कि इस मीटिंग में टीएमसी के भीतर बगावत को थामने की रणनीति पर भी बातचीत हुई.

राहुल संग अभिषेक की डेढ़ घंटे सीक्रेट मीटिंग, कुंद होगी TMC में बगावत की धार!Zoom

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने राुहल गांधी से मुलाकात की है.

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे घमासान ने सियासी तापमान बढ़ा रखा है. इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच करीब डेढ़ घंटे तक चली मुलाकात ने नई अटकलों को जन्म दिया है. सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति, इंडिया गठबंधन की भविष्य की रणनीति और आगामी चुनावों में विपक्षी एकता को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई. लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को सिर्फ इंडिया ब्लॉक की बैठक तक सीमित नहीं देखा जा रहा. इसकी टाइमिंग भी काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि यह बैठक ऐसे समय हुई है जब तृणमूल कांग्रेस अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट में से एक का सामना कर रही है.

डेढ़ घंटे तक क्या हुई चर्चा?

सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी के बीच पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के संबंधों को लेकर गंभीर बातचीत हुई. दोनों नेताओं ने इस बात पर भी चर्चा की कि भविष्य में दोनों दल भाजपा के खिलाफ किस तरह की रणनीति अपना सकते हैं. बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में होने वाले संभावित उपचुनावों में तालमेल या सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ. इंडिया गठबंधन को मजबूत करने और विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय बनाने का मुद्दा भी बातचीत के केंद्र में रहा. सूत्रों का दावा है कि पूरी बैठक सकारात्मक माहौल में हुई और दोनों नेताओं के बीच संवाद काफी बेहतर रहा.

क्या TMC की अंदरूनी बगावत भी रही एजेंडे में?

इस मुलाकात का सबसे दिलचस्प पहलू यही माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी को तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे ताजा घटनाक्रम की भी जानकारी दी. पार्टी पिछले कुछ दिनों से लगातार झटके झेल रही है. राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय पार्टी छोड़ चुके हैं. इसके बाद सुष्मिता देव के इस्तीफे की खबरों ने भी राजनीतिक हलचल बढ़ा दी. वहीं पार्टी के भीतर असंतुष्ट नेताओं का एक समूह लगातार चर्चा में है. कुछ रिपोर्टों में जादवपुर सांसद सायोनी घोष के भी असंतुष्ट खेमे के संपर्क में होने की बात सामने आई है, हालांकि इन दावों पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है. ऐसे में माना जा रहा है कि अभिषेक ने राहुल गांधी के सामने पार्टी की मौजूदा चुनौतियों और राजनीतिक हालात का अपना पक्ष रखा.

सोनिया गांधी से बढ़ा संवाद

दिलचस्प बात यह है कि हाल के दिनों में कांग्रेस और तृणमूल नेतृत्व के बीच संवाद बढ़ता दिखाई दिया है. दिल्ली दौरे के दौरान अभिषेक बनर्जी की मुलाकात कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी हुई थी. इससे पहले तृणमूल प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी सोनिया गांधी से मुलाकात कर चुकी हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये मुलाकातें सिर्फ शिष्टाचार भेंट नहीं हैं. इन बैठकों को विपक्षी एकता के व्यापक प्रयासों और इंडिया गठबंधन के भीतर संबंधों को मजबूत करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है.

बंगाल की राजनीति में बदलते समीकरण

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के रिश्ते हमेशा उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं. राष्ट्रीय स्तर पर दोनों दल इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन राज्य की राजनीति में वे अक्सर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते रहे हैं. ऐसे में राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की लंबी बैठक को भविष्य के राजनीतिक समीकरणों के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है. विशेष रूप से तब जब भाजपा लगातार बंगाल में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है.

ममता के लिए क्यों अहम है यह संवाद?

तृणमूल कांग्रेस इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रही है. एक तरफ पार्टी के भीतर असंतोष और बगावत की खबरें हैं. दूसरी तरफ विपक्षी राजनीति में अपनी केंद्रीय भूमिका बनाए रखने की चुनौती भी है. ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व के साथ बेहतर संवाद ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दोनों के लिए राजनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है. यह न सिर्फ इंडिया गठबंधन में उनकी भूमिका को मजबूत करेगा, बल्कि पार्टी के भीतर उठ रहे सवालों के बीच एक व्यापक राजनीतिक संदेश भी देगा.

क्या बगावत की धार कुंद करने की कोशिश?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मुलाकात का एक बड़ा संदेश पार्टी के अंदर भी गया है. जब शीर्ष विपक्षी नेता एक साथ दिखाई देते हैं और रणनीतिक स्तर पर संवाद बढ़ाते हैं, तो इससे कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच स्थिरता का संदेश जाता है. यही वजह है कि राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की यह डेढ़ घंटे की मुलाकात केवल एक राजनीतिक बैठक नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा संकट के बीच शक्ति प्रदर्शन और भरोसा बहाली की कवायद के रूप में भी देखी जा रही है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस बातचीत का असर सिर्फ इंडिया गठबंधन तक सीमित रहता है या फिर बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही उठापटक पर भी दिखाई देता है.

About the Author

संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें



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