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रिटायरमेंट के बाद 5 एकड़ में घास उगा सालाना 50 लाख छाप...


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Ranchi’s Entrepreneur Build Business After Retirement: रांची के इंद्रभूषण ने रिटायरमेंट के बाद लेमनग्रास की खेती शुरू की और अनंतहा नाम की कंपनी डाली. इनके प्रोडक्ट्स की इतनी मांग है कि आज सालाना टर्नओवर 50 लाख से ज्यादा है. इतना ही नहीं उन्होंने करीब 100 लोगों को रोजगार भी दिया है.

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रांची. रांची के इंद्रभूषण 2 साल पहले सरकारी नौकरी से रिटायर हुए हैं. उन्होंने बताया कि वह लेमनग्रास की खेती करते हैं. इसके तहत उन्होंने अनंतहा नाम की कंपनी भी बनाई है. इसके तहत लेमनग्रास से कई तरह के उत्पाद बनाते हैं. जैसे चेहरे पर लगाने वाला तेल, परफ्यूम, घर धोने वाला फिनाइल आदि. आज उनके उत्पादों की मांग अंडमान निकोबार तक है और उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये से ऊपर है.

एक बार लगाएं, 5 साल तक फसल पाएं
उन्होंने बताया कि इसकी खास बात यह है कि एक बार इसे लगाइए और 5 साल तक यह फसल देता रहता है. इंद्रभूषण बताते हैं कि सबसे बड़ी खास बात इसकी यही है कि हर फसल को हर सीजन में लगाना होता है. लेकिन इसे अगर आप एक बार लगाते हैं, तो यह घास की तरह अपने आप दोबारा उग जाता है. आपको इसे दोबारा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती.

रिटायरमेंट के बाद अब दूसरों को रोजगार देते हैं
इंद्रभूषण बताते हैं, ‘अब मैं रिटायरमेंट के बाद दूसरों को रोजगार देता हूं. पहले मैं खुद नौकरी करता था. लेकिन शरीर अच्छा है, दिमाग बढ़िया है, तो फिर घर में क्यों बैठना. रिटायरमेंट तो एक नौकरी से हुआ है, जिंदगी से थोड़ी. इसलिए मैंने सोचा, अब तक मैंने नौकरी की, अब दूसरों को दूंगा. इसीलिए मैंने अपनी यह कंपनी शुरू की. हमारी ऑफिशियल वेबसाइट, इंस्टाग्राम पेज, फेसबुक पेज हर एक चीज है. वहां से हर दिन 100 से अधिक ऑर्डर आते हैं.’

खूबियों का भंडार है लेमनग्रास
‘मैं लेमनग्रास के बारे में पहले से जानता था कि यह एंटीबैक्टीरियल और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुणों से भरा हुआ है. अगर आप अपने ऑफिस के केबिन में थोड़ा सा इसे छिड़क दें, तो आपका पूरा मूड फ्रेश हो जाएगा. पानी में थोड़ा सा मिला दें, तो घर की गंदगी एकदम साफ हो जाएगी. अगर चेहरे पर थोड़ा सा लगा लें, तो पिंपल्स व दाग-धब्बे गायब हो जाएंगे. इसमें इतनी सारी खूबियां हैं, क्योंकि यह एंटीबैक्टीरियल है.’

100 से अधिक लोग हमसे जुड़े हुए हैं
इंद्रभूषण बताते हैं, ‘आज हमारे स्टाफ में 100 से अधिक लोग हमसे जुड़े हुए हैं और जो खेती-बाड़ी करते हैं, उनको मिलाकर और भी लोग इससे जुड़े हैं. उनका घर इससे चलता है. यह देखकर बड़ा अच्छा लगता है कि आज रिटायरमेंट के बाद मैं दूसरों को रोजगार देने का काम कर रहा हूं. दूसरे लोगों से भी मेरी यही अपील है कि रिटायरमेंट का मतलब घर पर बैठना नहीं होता है. रिटायरमेंट का मतलब अपनी जिंदगी की दूसरी पारी शुरू करने का सबसे बढ़िया समय होता है. जो आपने अपने मन में इच्छा रखी होती है, यह समय उसे पूरा करने के लिए सबसे परफेक्ट समय होता है.’

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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