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मेडिकल सीट के लिए बैकडोर एंट्री का शक, सीआईडी खंगाल रही है अब वित्तीय लेनदेन रिम्स में वर्ष 2025 के एमबीबीएस और बीडीएस नामांकन मामले में सीआईडी की जांच मनी ट्रेल पर केंिद्रत हो गई है। बुधवार को सीआईडी ने इस मामले में रिम्स में छापेमारी की थी और एडमिशन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए थे। सीआईडी की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि भारी-भरकम स्क्रूटनी और कड़े नियमों को ठेंगा दिखाते हुए गलत जाति प्रमाण पत्र के आधार पर प्रतिष्ठित मेडिकल सीटों पर कब्जा कर लिया गया। अब सीआईडी अब इस मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और जालसाजी से जुड़े गंभीर प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करने की तैयारी में है। एफआईआर में भ्रष्टाचार और जालसाजी की धाराएं जुड़ती हैं और पैसों के लेनदेन के सबूत मिलते हैं तो इस मामले में ईडी की भी एंट्री हो सकती है। सीआईडी की अब तक की जांच में यह साफ हो गया है कि रिम्स के इस बैच में कम से कम दो अभ्यर्थियों के जाति प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी और गलत हैं। इन दोनों जालसाज अभ्यर्थियों ने न सिर्फ नियमों को तोड़ा, बल्कि उन दो मेधावी और योग्य छात्रों का भविष्य भी हमेशा के लिए बर्बाद कर दिया, जो अपनी दिन-रात की मेहनत के बाद भी इनकी वजह से रेस से बाहर हो गए। -शेष पेज 13 पर सीआईडी कर रही जांच-कहीं पैसों का खेल तो नहीं जानकारों के मुताबिक, देश और राज्य के टॉप सरकारी कॉलेजों में एमबीबीएस की एक सीट पाने के लिए लोग एक-एक करोड़ रुपए तक खर्च करने को तैयार रहते हैं। ऐसे में सीआईडी को आशंका है कि बिना किसी बड़े वित्तीय लेन-देन या भारी-भरकम रिश्वत के इस तरह का दुस्साहस मुमकिन नहीं है। क्या बैकडोर एंट्री के लिए करोड़ों का खेल हुआ। सीआईडी अब इसी मनी ट्रेल और सिंडिकेट को खंगाल रही है। अगर पैसे के लेन-देन के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो यह राज्य का बड़ा एडमिशन घोटाला सामने आ सकता है।
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