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रिसर्च… ब्रिटेन का पेटेंट, पौधों से जैव-सक्रिय तत्व निकालने का प्रोसेस आसान,...




झारखंड के जंगलों में मौजूद औषधीय पौधों के वैज्ञानिक उपयोग की दिशा में बड़ी उपलब्धि सामने आई है। डीएसपीएमयू के वनस्पति विज्ञान के डॉ. अशोक कुमार नाग और दिल्ली यूनिवर्सिटी की डॉ. अंजना सागर ने पौधों से औषधीय महत्व वाले जैव-सक्रिय तत्व निकालने के लिए एक उपकरण विकसित किया है। दोनों शिक्षकों के संयुक्त रिसर्च को ब्रिटेन के बौद्धिक संपदा कार्यालय से डिजाइन पंजीकरण मिला है। इससे झारखंड की वनस्पति संपदा पर होने वाले औषधीय शोध को नई गति मिलने की उम्मीद है। उपकरण का उद्देश्य औषधीय पौधों से उपयोगी रासायनिक तत्वों को अलग कर उनका वैज्ञानिक अध्ययन आसान बनाना है। पौधे से प्राप्त अर्क में मौजूद अलग-अलग रासायनिक तत्वों को अलग करने के बाद उनकी संरचना, शुद्धता और जैविक प्रभाव की जांच की जाती है। विकसित उपकरण इसी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है। राज्य के औषधीय पौधों पर शोध में महत्वपूर्ण किसी पौधे को सीधे दवा में नहीं बदला जा सकता। पहले उसमें मौजूद संभावित उपयोगी तत्वों को अलग करना, उनकी पहचान करना और प्रभाव की वैज्ञानिक जांच जरूरी है। यही वह शुरुआती चरण है, जिसे यह उपकरण आसान बनाने के लिए विकसित किया गया है। इस लिहाज से यह तकनीक झारखंड के औषधीय पौधों पर होने वाले शोध के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। हमारा लक्ष्य झारखंड की वनस्पति संपदा में मौजूद उपयोगी जैव-सक्रिय तत्वों को वैज्ञानिक तरीके से पहचानना व उनके अध्ययन की प्रक्रिया को बेहतर बनाना है। ब्रिटेन से मिली मान्यता हमारे शोध को अंतरराष्ट्रीय पहचान देने वाली उपलब्धि है। अब हमारा प्रयास इस शोध को आगे व्यावहारिक उपयोग की दिशा में ले जाने का है। – डॉ अशोक नाग, असिस्टेंट प्रो. बॉटनी इस रिसर्च क्या होगा लाभ



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