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विकास कार्यों पर लगी रोक के खिलाफ नप जनप्रतिनिधियों ने गेट पर...




भास्कर न्यूज|गुमला गुमला नगर परिषद क्षेत्र में संचालित करीब साढ़े पांच करोड़ रुपए की विकास योजनाओं को जांच के नाम पर बंद कराए जाने के विरोध में जनप्रतिनिधियों का गुस्सा फूट पड़ा है। इसके विरोध में जनप्रतिनिधियों ने विकास विरोधी नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए नप कार्यालय में अनिश्चितकालीन तालाबंदी कर दी है। अध्यक्ष शकुंतला उरांव और उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी के संयुक्त नेतृत्व में पहुंचे पार्षदों ने कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। इसके बाद बाहर शाम पांच बजे तक बैठे रहे। जनप्रतिनिधियों ने कहा है कि जब तक रुकी हुई योजनाएं पुनः शुरू नहीं की जातीं और विकास कार्य गति नहीं पकड़ती। तब तक एसआईआर को छोड़कर सभी प्रशासनिक और नागरिक कामकाज पूरी तरह से ठप रहेंगे। तालाबंदी के दौरान अध्यक्ष शकुंतला उरांव ने स्थानीय विधायक पर हमला बोला। उन्होंने विधायक को सीधे तौर पर विकास विरोधी करार देते हुए कहा कि विधायक के इशारे पर ही उपायुक्त द्वारा जांच का बहाना बनाकर धरातल पर चल रहे विकास कार्यों को जबरन रुकवा दिया गया है। अध्यक्ष ने कहा कि विधायक खुद जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं। उन्हें तो क्षेत्र के विकास का सारथी बनना चाहिए और नगर परिषद के साथ कदम से कदम मिलाकर विकास को रफ्तार देनी चाहिए। लेकिन इसके विपरीत वे शुरू से ही जनहित के कार्यों को प्रभावित और बाधित करने की राजनीति कर रहे हैं। जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मौके पर पार्षद संगियस तिर्की, प्रवीण टोप्पो, मोसर्रत प्रवीण, उमा देवी, नेहा लकड़ा, विजेता मिंज, नूतन रानी, शैल मिश्रा मौजूद थीं। इस तालाबंदी और विरोध प्रदर्शन के दौरान नगर परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के साथ कुल 22 वार्ड पार्षदों में से आधे से भी कम पार्षद मौके पर मौजूद रहे। नप कार्यालय के बाहर जनप्रतिनिधियों के इस तेवर को देखकर प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। जिस कारण सुरक्षा के मद्देनजर मौके पर पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गई थी। अब देखना है कि साढ़े पांच करोड़ के योजनाओं पर लगा ग्रहण कब हटता है और जनता को राहत कब मिलती है। उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी ने जिला प्रशासन और उपायुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि डीसी ने जनप्रतिनिधियों के मान-सम्मान को गहरी ठेस पहुंचाई है। जब नप का एक शिष्टमंडल इस समस्या को लेकर उपायुक्त से मिलने गया था। तब हमने साफ शब्दों में विकास कार्यों को रोकने का कड़ा विरोध दर्ज कराया था। लेकिन डीसी ने केवल आश्वासन देकर हमें टाल दिया और हमारी जायज मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने साफ किया कि यह लड़ाई किसी व्यक्तिगत स्वार्थ की नहीं बल्कि गुमला की जनता के हक और जनहित के लिए है। जो मांगें पूरी होने तक लगातार जारी रहेगी।



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