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विकास पाटनी के संग्रह में भारत के अलावा नीदरलैंड, बांग्लादेश, अमेरिका, अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, मेक्सिको, रोमानिया, जिम्बाब्वे, इराक, कनाडा सहित कुल 88 देशों के डाक टिकट शामिल हैं. इन टिकटों में कई ऐसे भी हैं जो अब आसानी से देखने को नहीं मिलते और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं.
झुमरी तिलैया: डिजिटल युग में जहां पत्र लिखने और डाक टिकटों का उपयोग पहले की तुलना में काफी कम हो गया है वहीं झुमरी तिलैया के स्टेशन रोड निवासी विकास पाटनी आज भी डाक टिकटों के प्रति अपने जुनून को जीवित रखे हुए हैं. करीब तीन दशक से अधिक समय से डाक टिकटों का संग्रह कर रहे विकास पाटनी ने भारत सहित दुनिया के 88 देशों के दुर्लभ डाक टिकटों का अनमोल संग्रह तैयार किया है. अपने इस अनोखे शौक की बदौलत उन्होंने कोडरमा जिले में एक अलग पहचान बनाई है.
स्कूल के दौरान शुरू हुआ शौक, लोगों की हेल्प से बढ़ा डाक टिकटों का संग्रह
विशेष बातचीत में विकास पाटनी ने बताया कि डाक टिकट संग्रह करने की शुरुआत उनके स्कूल जीवन से हुई थी. उस समय उनके कई दोस्त भी विभिन्न देशों और राज्यों के डाक टिकट इकट्ठा करने का शौक रखते थे. स्कूल के दिनों में शुरू हुआ यह शौक समय के साथ उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया. हालांकि, पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके अधिकांश दोस्तों ने यह शौक छोड़ दिया लेकिन विकास पाटनी ने इसे कभी नहीं छोड़ा. उन्होंने लगातार डाक टिकटों का संग्रह जारी रखा. उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे लोगों को उनके इस शौक की जानकारी मिलती गई वैसे-वैसे उनका संग्रह भी बढ़ता गया. जिन लोगों के रिश्तेदार या परिचित विदेशों से पत्र भेजते थे वे उन पत्रों पर लगे डाक टिकटों को संभालकर विकास पाटनी को दे देते थे. इस तरह धीरे-धीरे दुनिया के विभिन्न देशों के दुर्लभ और आकर्षक डाक टिकट उनके संग्रह का हिस्सा बनते गए.
88 देशों के डाक टिकट
विकास पाटनी के संग्रह में भारत के अलावा नीदरलैंड, बांग्लादेश, अमेरिका, अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, मेक्सिको, रोमानिया, जिम्बाब्वे, इराक, कनाडा सहित कुल 88 देशों के डाक टिकट शामिल हैं. इन टिकटों में कई ऐसे भी हैं जो अब आसानी से देखने को नहीं मिलते और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं. प्रत्येक डाक टिकट अपने देश की संस्कृति, इतिहास, महत्वपूर्ण घटनाओं की कहानी अपने भीतर समेटे हुए है. उन्होंने बताया कि उनके इस अनूठे संग्रह की जानकारी जब झुमरी तिलैया डाक विभाग को मिली तो विभाग ने उनके कार्य की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित भी किया.
संग्रह को बढ़ाने में परिवार भी करता है सहयोग
विकास पाटनी ने बताया कि उनके इस सफर में उनका परिवार हमेशा उनके साथ खड़ा रहा है. उनकी पत्नी और बेटी भी नए डाक टिकटों की तलाश में उनकी मदद करती हैं. यदि कहीं से किसी विदेशी पत्र या दुर्लभ डाक टिकट की जानकारी मिलती है तो पूरा परिवार उसे संग्रह में शामिल करने का प्रयास करता है. यही कारण है कि उनका संग्रह लगातार समृद्ध होता जा रहा है.
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