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भास्कर न्यूज|लोहरदगा जिले में विभिन्न स्थानों पर बंगभाषियों सहित सनातन धर्मावलंबियों ने मां दुर्गा के विपत्ति तारिणी स्वरूप की मंगलवार को पूजा की। शहर के वीर शिवाजी चौक स्थित श्रीश्री सिद्धि धात्री दुर्गा मंदिर, सुभाष चौक निकट स्थित श्रीश्री दुर्गा बाड़ी एवं हटिया गार्डन निकट स्थित श्री हरि बाबा काली मंदिर में सार्वजनिक रूप से इस पूजा में काफी संख्या में मां विपत्ति तारिणी के भक्त शामिल हुए। श्रीश्री सिद्धि धात्री दुर्गा मंदिर में पुरोहित हरिहर शास्त्री ने पूजा संपन्न कराई। वहीं दुर्गा बाड़ी में पुरोहित यादव राय ने पूजा कराई। यह पूजा रथ की द्वितीया में मनायी जाती है। सैकड़ों की संख्या में भक्तों की भीड़ यहां उमड़ी। इस बीच यज्ञ व पुष्पांजलि भी कराया गया। दशहरा में मां दुर्गा की पूजा में परंपरा की तरह इसमें भी सिंदूर खेला हुआ। महिलाओं ने एक दूसरे के मांग में सिंदूर भरकर उनके सुहाग की लंबी उम्र की कामना की। इसके अलावा श्री हरि बाबा काली मंदिर में रामसेवक पाठक और देवेंद्र पाठक ने संपन्न कराई। सभी ने प्रसाद भी ग्रहण किया।पुराहितों ने बताया कि इस पूजा को मार्कण्डेय पुराण एवं देवी पुराण के अनुसार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष के तृतीया तिथि से नवमी के बीच शनिवार एवं मंगलवार को यह पर्व मनाने का विधान है। आदि शक्ति का 108 रुप में से ही एक रूप मां विपत्तितारिणी हैं। जावा फूल, बेलपत्र सहित 13 प्रकार के फूल, फल एवं नैवेद्य अर्पण करते हुए देवी माता की पूजा होती है। महिला व्रतियों द्वारा उपवास रखकर यह पर्व काफी श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न किया जाता है। पूजा अनुष्ठान के अवसर पर व्रतियों द्वारा व्रत कथा भी सुनी जाती है। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान 13 गांठ युक्त पवित्र लाला धागा में आठ दुर्वा दल बांधकर महिला एवं पुरुष क्रमशः बांया और दाहिना बांह में धारण करते हैं। यह सुरक्षा का प्रतीक है। ऐसी मान्यता है कि यह व्रत करने तथा बांहों में रक्षा सूत्र के रूप में लाल धागे बांधने से किसी प्रकार की बाधा-विपत्ती और असुरक्षा पास नहीं मंडराता है।
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