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शेल कंपनियों से मनी ट्रेल:सीआईडी को करोड़ों के मनी ट्रेल के सबूत...




जेपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षाओं में हुए भ्रष्टाचार की परतें सीआईडी लगातार खोलती जा रही हैं। सीआईडी के वित्तीय अनुसंधान में करोड़ों रुपए के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और मनी ट्रेल के पुख्ता डिजिटल व दस्तावेजी प्रमाण सामने आए हैं। अनुसंधान एजेंसी ने विभिन्न बैंकों से बैंकर्स बुक ऑफ एविडेंस एक्ट के तहत बैंक स्टेटमेंट, खाता खोलने के फॉर्म और केवाईसी दस्तावेज विधिवत हासिल कर केस डायरी में संलग्न किए हैं। मुख्य सरगना अभय कुमार तिवारी के प्रकाश रेसिडेंसी के नाम से संचालित खाते (खाता संख्या 10066389711) और सागर पैलेस के नाम वाले खाते (खाता संख्या 10060321804) से बड़े पैमाने पर अवैध ट्रांजैक्शन पकड़े गए हैं। जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते की पत्नी लाल रिंकीमनी के खाते (खाता संख्या 10208236718) के रिकॉर्ड भी सीआईडी ने जुटाए हैं। अभय तिवारी की शेल फर्म सान्वी सप्लाई एंड सर्विसेज के बैंक खाता (संख्या 924020074980993) और दलाल पवन कुमार सिंह के खाते से संदिग्ध रकम के प्रवाह के दस्तावेज मिले हैं। अभय तिवारी के खाते (संख्या 0712553870) के स्टेटमेंट में भारी गड़बड़ी पाई गई है। इसी खाते का 8 लाख रुपए का भरा हुआ चेक (चेक सं. 00000035) दलाल लालू यादव के ठिकाने से सीआईडी ने बरामद किया है। अभय तिवारी के ईएसएएफ खाते (संख्या 53240000084470) की जांच से अभ्यर्थियों से लिए गए कमीशन का पर्दाफाश हुआ है। लालू यादव के घर से इसी बैंक के 7 हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक जब्त किए गए हैं। कोचिंग संचालक के भाइयों की 10 दिन बाद लिखी गई मेंस की कॉपी चार्जशीट का तीसरा और सबसे चौंकाने वाला पहलू परीक्षा केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज और दलालों के नेटवर्क से उजागर हुआ है। शिवांगन कोचिंग के निदेशक संजीत कुमार ने सीआईडी की पूछताछ में कबूल किया कि उसने एफआरओ परीक्षा में अपने चचेरे भाई पंकज प्रसून और मौसेरे भाई रितिक रोशन की सेटिंग सीधे दागी एजेंसी और मुख्य दलालों से कराई थी। पंकज प्रसून और रितिक रोशन ने परीक्षा हॉल में उत्तर लिखने के बजाय, एफआरओ मुख्य परीक्षा खत्म होने के पूरे 10 दिन बाद परीक्षा केंद्र से बाहर एक गुप्त ठिकाने पर बैठकर मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं लिखी थीं। सीआईडी को आरोपियों के मोबाइल डेटा, सीडीआर लोकेशन और वित्तीय लेन-देन से इस 10 दिन बाद की राइटिंग के साक्ष्य मिले हैं। इतना ही नहीं, टीडीपीएल के गिरफ्तार कर्मचारी रक्षक सिंह के जब्त मोबाइल से किसी गुप्त स्थान पर मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिका लिखे जाने की बाकायदा वीडियो रिकॉर्डिंग भी बरामद कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजी गई है। बुद्धेश्वर के पास 24 सेटिंग अभ्यर्थियों की सूची मिली, इनमें 11 सफल हुए सीआईडी की साइबर फॉरेंसिक जांच में बुद्धेश्वर के लैपटॉप से 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के 24 सेट अभ्यर्थियों की गोपनीय सूची बरामद की गई। इस सूची का जब जेपीएससी के पीटी परीक्षा परिणाम से मिलान कराया गया, तो जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। सूची में दर्ज 24 में से 11 अभ्यर्थी 14वीं सिविल सेवा पीटी में सीधे तौर पर सफल पाए गए। लैपटॉप से मिली सूची में हजारीबाग निवासी दो सगे भाइयों दिलीप कुमार राणा और ओम प्रकाश कुमार राणा के नाम भी शामिल थे। सीआईडी ने जब दोनों भाइयों को नोटिस देकर तलब किया और कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने स्वीकार किया कि बुद्धेश्वर भगत सिंडिकेट से जुड़े दलाल संतोष कुमार के जरिए उनका 20-20 लाख रुपए में सौदा तय हुआ था। इस अवैध लेन-देन और संपर्क की पुष्टि आरोपियों के मोबाइल की सीडीआर और वित्तीय विश्लेषण से पूरी तरह प्रमाणित हो चुकी है। दोनों भाइयों को सीआईडी ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। सर्टिफिकेट के साथ ब्लैंक चेक लिए जाते थे सीआईडी की जांच में यह भी सामने आया कि सिंडिकेट अभ्यर्थियों से सुरक्षा के तौर पर मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के साथ-साथ हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक भी जमा कराता था, ताकि चयन के बाद पूरी रकम वसूली जा सके। कई खातों में नकद जमा, आरटीजीएस/यूपीआई और हवाला नेटवर्क के जरिए भारी रकम का अंतरण किया गया था।



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