भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

संसद में ऐसा कौन सा बिल ला रहे मोदी-शाह, इंडी कैंप में...


बहुत दिनों से ये बातें हो रही हैं कि FCRA बिल कब आएगा? डिलिमिटेशन बिल आएगा या नहीं? इंडी वाले अलग नारे लगा रहे थे कि नरेंद्र मोदी कहां हैं. अमित शाह कहां हैं. लेकिन अब कोई नहीं पूछेगा कि मोदी-शाह कहां है, क्योंकि संसद में कुछ तो बड़ा होने वाला है, जिससे इंडी वाले अलर्ट हो गए हैं. अपने-अपने सांसदों को कह दिया है कि कोई इधर उधर नहीं जाएगा, क्योंकि सरकार और बीजेपी ने भी किसी बड़े एक्शन की पूरी तैयारी कर रखी है.

बीजेपी ने अपने सभी सांसदों के लिए व्हिप जारी कर दिया है. सभी को 11, 12 और 13 अगस्त को संसद में मौजूद रहने को कहा है. उधर कांग्रेस ने भी अपने सांसदों को मौजूद रहने को कहा है. यानी तगड़ा माहौल बन गया है कि अगले कुछ दिनों में संसद में कुछ तो बड़ा हो सकता है, जिसके लिए हड़कंप मचा है. व्हिप जारी हो रहे हैं.

विपक्ष के हंगामे वाले तेवर को मोदी सरकार ने नंबर से जवाब देना शुरू कर दिया है और अगले 4 दिन में वो होने वाला है, जिससे विपक्ष की नींद उड़ने वाली है. डिलिमिटेशन यानी परिसीमन और FCRA यानी विदेशी चंदे वाले बिल पर सरकार ने कोई आधिकारिक घोषणा तो नहीं की है, लेकिन बीजेपी से लेकर कांग्रेस तक ने व्हिप जारी कर सभी सांसदों को संसद में मौजूद रहने के आदेश दे दिए हैं. कांग्रेस ने तो साफ इनकार कर दिया है कि वो किसी कीमत पर FCRA बिल को पास नहीं होने देगी और अगर इसे पास कराने की कोई गुंजाईश बनती भी है वो इंडी वाले गुट से बातकर फैसला लेंगे.

FCRA बिल पर बंटा विपक्षी गठबंधन

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ‘FCRA पर तो हम विरोध करने वाले हैं. दूसरी चीज ऑल पार्टी मीटिंग बुलाकर जो हमेशा फ्लोर लीडर की मीटिंग होती है, उसमें निर्णय लेंगे. मैं समझता हूं सभी दल के लोग जो निर्णय लेंगे उसी के तहत हम चलेंगे.’

हालांकि विपक्षी गुट के कुछ सांसदों ने मोदी सरकार के बिल पर ग्रीन सिग्नल देना शुरू कर दिया है. NCP शरद पवार गुट के 8 सांसद कल संसद में पीएम मोदी से मुलाकात करने वाले हैं. इसका मतलब क्या है? क्या मोदी सरकार ने बिल को पास कराने के लिए नंबर को साधना शुरू कर दिया है?

एनसीपी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, ‘अगर बाहर बारिश आएगी तो आप छाता लेंगे या रेनकोट, देश के प्रधानमंत्री को मिलने जा रही हूं. मैं थोड़े किंतु-परंतु करूंगी भैया. ऐसा नहीं होता, ये बहुत जिम्मेदारी का काम होता है. ये प्रधानमंत्री हैं उनका हमें हमेशा आदर होना चाहिए, हम सांसद उनको मिलने जा रहे हैं, पॉलिसी के लिए जा रहे हैं ना, आजकल क्या हो गया है, कोई किसी से मिलता है तो गॉसिप हो गया है, दुर्भाग्य की बात है, हमारी पॉलिसी मेकिंग को कई सीरियस नहीं ले रहा है, बहुत-बहुत दुर्भाग्य है, मेरे जैसे सांसदों को बहुत-बहुत दुख होता है.’

शरद पवार गुट की एनसीपी के सभी 8 लोकसभा सांसद 10 अगस्त को पार्लियामेंट में पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे. यह मुलाकात अलग अलग मुद्दों पर होगी. इस मुलाकात की खबरों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल शुरू हो गई है. लेकिन सवाल है कि विपक्ष को FCRA या परिसीमन बिल से इनती दिक्कत क्यों हो रही है?

बीजेपी सांसद मनोज तिवारी कहते हैं, ‘जब बिल आया तो उस समय दबाव में समर्थन दिया, सही था लेकिन बिल लागू भी तो होना चाहिए. जब बिल लागू होगा तभी होगा जब परिसीमन होगा, लखनऊ की आबादी आज से 20 साल पहले कितनी थी और आज कितनी थी तो संविधान तो ये कहता है कि ना हर लोकसभा में 12-15 लाख होनी चाहए, यहां 40-40 लाख हो गए लोग. मैं जहां का सांसद हूं, वहां 26 लाख वोटर हैं. हम कैसे न्याय करेंगे और समय के साथ सीट नहीं बढ़ेगी तो कैसे काम चलेगा और परिसीमन नहीं होगा तो सीट कैसे बढ़ेगी. तो घुमा फिराकर महिलाओं का विरोध करना चाहते हैं और मुझे लगता है कि देश के कई सांसद समझ गए हैं और महिला आरक्षण बिल पास होगा और राहुल गांधी देखते रहेंगे.’

क्या नंबर जुटाने में लगी है सरकार?

विपक्षी खेमे में हड़कंप मचा हुआ है कि वो इधर हंगामा करते रहें और आखिरी वक्त में मोदी सरकार कोई बड़ा विधेयक पास ना करा दे. सरकार ने भले ही FCRA, डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण बिल पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ कह दिया है कि ये बिल सरकार की प्राथमिकता हैं. उन्होंने कहा कि दोनों विधेयक जरूर पेश होंगे, लेकिन कब पेश होंगे और कब पारित होंगे, इसकी जानकारी बाद में दी जाएगी.

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नए सांसदों के साथ बैठक और गृह मंत्री अमित शाह की अलग-अलग दलों के सांसदों से मुलाकात ने सियासी हलचल और तेज कर दी है. लेकिन संसद के गलियारों में सिर्फ FCRA बिल की ही चर्चा नहीं है. एक और मुद्दा है, जिसने दक्षिण से लेकर उत्तर भारत तक की राजनीति में हलचल मचा रखी है. और वो है डिलिमिटेशन यानी परिसीमन.

FCRA पर लड़ाई विदेशी फंडिंग और राजनीतिक पारदर्शिता को लेकर है, लेकिन डिलिमिटेशन का सवाल सीधे-सीधे सत्ता के गणित से जुड़ा हुआ है. यही वजह है कि विपक्ष के कई दल और नेताओं की नींद डिडिमिटेशन बिल के नाम से उड़ी हुई है. दक्षिण भारत के दलों को डर है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का नया बंटवारा हुआ तो उनकी राजनीतिक ताकत कम हो सकती है, जबकि उत्तर भारत के कई राज्यों को इससे फायदा मिलने की संभावना दिखाई दे रही है.

डिलिमिटेशन बिल से विपक्ष इतना बेचैन क्यों?

यानी ये सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ाने या घटाने का मामला नहीं है. बल्कि आने वाले दशकों के लिए देश की राजनीतिक ताकत किसके हाथ में रहेगी, इसकी भी लड़ाई बनती जा रही है और इसी वजह से संसद में FCRA के साथ-साथ डिलिमिटेशन बिल को लेकर भी अटकलें तेज हैं. अब सवाल ये है कि आखिर डिलिमिटेशन है क्या… विपक्ष इसके नाम से इतना बेचैन क्यों है… और मोदी सरकार इसे लेकर क्या तैयारी कर रही है?

डिलिमिटेशन का मतलब है लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों की संख्या का पुनर्निर्धारण. ये काम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाता है ताकि बढ़ती या घटती आबादी के हिसाब से प्रतिनिधित्व संतुलित रहे.

1976 से लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण पर रोक लगी हुई है, जिसे बाद में 2001 और फिर 2026 तक बढ़ाया गया. अब 2026 के बाद नए परिसीमन की चर्चा तेज है.

दक्षिण भारत के कई राज्य जैसे तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश कहते हैं कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की है. अगर केवल आबादी के आधार पर सीटें बढ़ाई गईं, तो उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे अधिक आबादी वाले राज्यों को ज्यादा सीटें मिल सकती हैं, जबकि दक्षिणी राज्यों का संसद में प्रभाव घट सकता है.

लेकिन बीजेपी का सीधा जवाब है कि देश के लोगों को उनके प्रतिनिधित्व के हिसाब से हक मिलना चाहिए. अगर किसी इलाके की आबादी बहुत बढ़ गई है तो वहां के लोगों का प्रतिनिधित्व भी उसी अनुपात से होना चाहिए, लेकिन विपक्षी खेमों को अपनी सत्ता और वोट बैंक खोने का डर है.

11 से 13 अगस्त तक क्यों रहेंगी निगाहें?

डिलिमिटेशन सिर्फ सीटों की नई ड्रॉइंग नहीं है, बल्कि ये तय कर सकता है कि आने वाले सालों में संसद में किस इलाके की राजनीतिक ताकत कितनी होगी. इसलिए इस मुद्दे पर इतना बड़ा राजनीतिक घमासान मचा हुआ और इस सबके बीच आबादी का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो रहा है. मॉनसून सत्र में सरकार ने अभी तक 8 बिल पेश किए हैं, जिसमें से 5 बिल एक सदन से पास हो चुके हैं. इसी हफ्ते 4 और बिल सदन में पेश होंगे.

  • ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026 को कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पेश करेंगे, इस बिल का मकसद अलग-अलग न्यायाधिकरणों की प्रक्रियाओं में सुधार लाना है.
  • खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026, इसे केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी पेश करेंगे. ये खान और खनिज अधिनियम, 1957 में संशोधन के लिए है.
  • केरल (नाम में परिवर्तन) विधेयक, 2026 को अमित शाह पेश करेंगे.
  • बहु-राज्य सहकारी समिति (संशोधन) विधेयक भी अमित शाह पेश करेंगे, ये बिल सहकारिता क्षेत्र के विकास से जुड़ा हुआ है.

अब निगाहें 11, 12 और 13 अगस्त पर टिकी हैं, क्योंकि सवाल सिर्फ कुछ बिलों का नहीं है. सवाल ये है कि क्या मोदी सरकार संसद में ऐसा राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक खेलने जा रही है, जो विपक्ष के पूरे गणित को बदल देगी.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top