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छतरपुर जिले के लवकुश नगर के राजेंद्र प्रसाद चौरसिया जिन्होंने आज से 20 साल पहले अपने छोटे भाई के साथ मिलकर कम पूंजी में समोसे की एक छोटी सी दुकान खोली थी. दोनों भाइयों ने लगातार 20 साल मेहनत की.आज इन्होंने अपनी मेहनत की बदौलत करोड़ों रुपए का होटल खड़ा कर दिया है.
छतरपुर जिले के लवकुश नगर के राजेंद्र प्रसाद चौरसिया जिन्होंने आज से 20 साल पहले अपने छोटे भाई के साथ मिलकर कम पूंजी में समोसे की एक छोटी सी दुकान खोली थी. दोनों भाइयों ने लगातार 20 साल मेहनत की.आज इन्होंने अपनी मेहनत की बदौलत करोड़ों रुपए का होटल खड़ा कर दिया है. राजेंद्र के मुताबिक इस मुकाम तक पहुंचने के लिए हम दोनों भाइयों ने बहुत मेहनत की है. अगर आप ईमानदारी से अपने काम को करते हैं तो किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है. उनके घर में गरीबी थी. वह बहुत संघर्ष कर रहे थे. उस दौरान उन्होंने सबकुछ किया जिसमें पैसे मिलते थे. उन्होंने बचपन से ही काम करना शुरू कर दिया था. उन्होंने अपने कंधों में भूसा की बोरी भी ढोई, नाली भी साफ की, 5 रुपए कमाने के लिए मथुरा भी गए. दूसरों की दुकानों में काम भी किया लेकिन फिर भी घर खर्च नहीं चल पा रहा था.
राजेंद्र बताते हैं कि लवकुश नगर में वह पहले पान बरेजा लगाते थे. पान की खेती करते थे लेकिन किसी ने बरेजा में ही आग लगा दी थी. इसके बाद हम पूरी तरह से बेरोजगार हो गए. इसके बाद हमने हर तरह का काम किया. लेकिन जब स्थायी काम नहीं मिला तो फिर समोसा की दुकान में ही काम करने लगे. यहां से आइडिया आया कि हम भी समोसा बनाकर बेच सकते हैं. जब समोसे बनाना का अनुभव ले लिया तो फिर मैंने छोटे भाई बब्बी के साथ एक डिब्बे (गुमटी) से ही समोसा बनाकर बेचना शुरू कर दिया. अपने खुद के इस धंधे में थोड़ा सुकून मिला. धीरे-धीरे ग्राहकी बढ़ती गई. कुछ सालों बाद हमनें किराए में 2 कमरों की दुकान ले ली. समोसे को साथ मीठा-मिष्ठान भी बनाने लगे. इसके बाद हमारा ये बिजनेस बढ़ता ही चला गया.
4 फ्लोर की बिल्डिंग में बनाया होटल
राजेंद्र बताते हैं कि लोगों की भीड़ ज्यादा होने लगी थी. दुकान छोटी थी मैनेज नहीं हो पा रहा था तो फिर खुद ही नई बिल्डिंग बनवा ली. भगवान के आशीर्वाद से समोसे बेचकर ही होटल बनाने का सोच लिया. इस होटल को बनवाने में करोड़ रुपए से भी ज्यादा खर्च हो गया है. राजेंद्र बताते हैं कि आप अपनी मेहनत से सबकुछ पा सकते हैं. एक समय था हम काम की तलाश में रहते थे. लेकिन आज हमनें दूसरों को रोजगार दे रखा है. हमारे इस होटल में शादी-ब्याह, जन्मदिवस कार्यक्रम में भी होते हैं. यहां ठहरने की उत्तम व्यवस्था भी है.
समोसे बेचकर खड़ा किया करोड़ों का साम्राज्य
राजेंद्र बताते हैं कि समोसे बेचकर ही उन्होंने कई प्लॉट खरीद लिए और 20 बीघा जमीन खरीद ली. साथ ही 20 लाख की कार भी बच्चों को दिलाई है. इस समोसे ही उन्होंने जीवन की सभी शौक़ पूरी कर ली हैं.
अपनी सफलता का बताया मंत्र
राजेंद्र का मानना है कि अगर आप अपने काम को पूरी ईमानदारी और अनुशासित तरीके से करते हैं तो आपको सफलता जरूर मिलती है. बिजनेस में अगर आपको आगे बढ़ना है तो आपको अपने स्वभाव में विनम्रता रखनी होगी. आज हमारे पास भले ही लाखों करोड़ों रुपए की संपत्ति है लेकिन आज भी हमारा वही स्वभाव है जो संघर्ष के दिनों में था.