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सही समय पर खुल गया होर्मुज! वरना हो जाती दिक्‍कत, सरकारी एजेंसी...


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Oil Reserve : अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्ति और होर्मुज खुलने की खबरों के बीच आई एक रिपोर्ट में कई खुलासा किया गया है. इसमें बताया गया है कि सही समय पर होर्मुज खुल गया और तेल को लेकर आने वाला संकट टल गया. भारत के पास रणनीतिक रिजर्व महज 9 से 10 दिन का ही बचा है, क्‍योंकि उसका ज्‍यादातर आयात 6 देशों पर सीमित है.

सही समय पर खुल गया होर्मुज! वरना हो जाती दिक्‍कत, जानें देश में कितना तेल भंडाZoom

देश के पास क्रूड का कुल रणनीतिक भंडार 10 दिन का ही बचा है.

नई दिल्‍ली. ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता फाइनल होने के बाद इसी शुक्रवार से होर्मुज को खोलने की तैयारी है. इस बीच आई एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार देश रोजाना आयात के 10 दिन के बराबर ही बचा है. इससे पता चलता है कि होर्मुज का रास्‍ता बिलकुल सही समय पर खुल गया. अगर यह संघर्ष लंबा चलता तो देश के सामने पेट्रोलियम उत्‍पादों का संकट पैदा हो सकता था.

ऊर्जा, पर्यावरण एवं जल परिषद (सीईईडब्ल्यू) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि भारत का मौजूदा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार देश के शुद्ध कच्चे तेल के आयात का केवल नौ से 10 दिन की जरूरत के बराबर बचा है. यह आयात पर निर्भर अन्य प्रमुख देशों की तुलना में काफी कम है. रिपोर्ट में कहा गया कि कच्चे तेल के आयात पर अत्यधिक निर्भर अन्य देश जैसे जापान और दक्षिण कोरिया अपने पास 200 दिन से अधिक की जरूरत के बराबर भंडार बनाए रखते हैं.

85 फीसदी तेल खरीद 6 देशों से
परिषद ने ‘हाउ सिक्योर इज इंडियाज एनर्जी फ्यूचर? असेसिंग एक्सेसिबिलिटी, रिलायबिलिटी एंड अफोर्डेबिलिटी’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में बताया है कि भारत के कच्चे तेल के आयात का 85 फीसदी से अधिक हिस्सा रूस और प्रमुख पश्चिम एशियाई देशों सहित केवल छह देशों से आता है. इससे आपूर्ति में किसी भी प्रकार के व्यवधान या झटके से निपटने की क्षमता सीमित हो जाती है. भारत ने अपनी विविधता पर काम तो किया है, लेकिन अभी वहां से आयात बहुत सीमित मात्रा में होता है. यही वजह है कि हालिया संकट में भारत को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

कहां दिखेगा इसका असर
सीईईडब्ल्यू में फेलो हेमंत माल्या ने बताया कि कच्चे तेल, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी), एलपीजी, कोयले या प्रमुख समुद्री परिवहन मार्गों में व्यवधान का असर तेजी से रसोई गैस की लागत, परिवहन ईंधन की कीमतों, उर्वरक सब्सिडी, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और मुद्रास्फीति पर पड़ सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, गैस क्षेत्र में भारत अपनी कुल आवश्यकता का लगभग आधा हिस्सा एलएनजी आयात के माध्यम से पूरा करता है, लेकिन देश में गैस के लिए कोई समर्पित रणनीतिक भंडारण सुविधा नहीं है. इससे उर्वरक संयंत्रों और शहरी गैस वितरण नेटवर्क पर जोखिम बढ़ जाता है

कोयला सुरक्षा पर भी संकट
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्पात उत्पादन के लिए आयातित कोकिंग कोयले, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया से आयात पर निर्भरता और गैर-कोकिंग कोयले के आयात के मामले में इंडोनेशिया की निर्यात नीतियों के प्रति संवेदनशीलता से देश की कोयला सुरक्षा पर भी असर पड़ रहा है. घरेलू स्तर पर कोयले की गुणवत्ता में गिरावट और उत्पादन लागत में वृद्धि से कोयला आधारित बिजली उत्पादन की लागत संबंधी बढ़त स्थिर नवीकरणीय ऊर्जा की तुलना में कम होती जा रही है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



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