विश्व योग दिवस के संदर्भ में गुरुदेव श्रीश्री रवि शंकर ने कहा कि योग को केवल आसन और शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित करना उसके व्यापक अर्थ को घटा देता है। उनके अनुसार योग मन, बुद्धि और चेतना को परिष्कृत करने का विज्ञान है। गुरुदेव ने कहा, सम्मान का अर्थ है वर्तमान क्षण के प्रति सजगता और कृतज्ञता; यही उपस्थिति साधना को गहराई देती है। उन्होंने बच्चों को कम उम्र से योग-ध्यान से जोड़ने और नियमित अभ्यास पर जोर दिया।
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