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Aman Ayushkar Success Story: अगर इरादे मजबूत हों तो बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. ऐसा ही साबित कर दिखाया है झारखंड के साहिबगंज जिले के एक साधारण परिवार के बेटे ने अमन आयुषकर ने. अमन ने भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा में देशभर में 27वीं रैंक हासिल कर जिले और राज्य का नाम रोशन किया है और संघर्षशील युवाओं की प्रेरणा बनकर आगे आए हैं.

साहिबगंज के अमन आयुषकर की सफलता की प्रेरक कहानी
साहिबगंज. झारखंड के साहिबगंज जिले के ओझा टोली निवासी अमन आयुषकर ने भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service) परीक्षा में देशभर में 27वीं रैंक हासिल की है. ओझा टोली के रहने वाले अमन ने जहां अपनी मेधा का लोहा मनवाया है, वहीं परीक्षा परिणाम जारी होते ही परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई है. लोगों ने अमन को बधाई दी और उनकी इस उपलब्धि को युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया. उनकी इस विशेष उपलब्धि पर पूरे जिले में गर्व का माहौल है.
स्कूलिंग से इंजीनियरिंग तक की शिक्षा यात्रा
बता दें कि अमन आयुषकर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा साहिबगंज के सेंट जेवियर स्कूल से पूरी की और वर्ष 2009 में 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की. इसके बाद उन्होंने बीपीएस पूर्णिया (बिहार) से 12वीं की पढ़ाई की. उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने जाधवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता से बीटेक तथा IIT दिल्ली से एमटेक की डिग्री प्राप्त की. मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि के साथ उन्होंने आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी.
झारखंड के साहिबगंज के अमन आयुषकर ने IFS में टॉप 30 में जगह बनाई 27वीं रैंक हासिल की है.
सपनों के लिए छोड़ दी ‘क्लास वन’ की नौकरी
अमन की कहानी संघर्ष और जुनून की एक मिसाल है. उन्होंने साल 2018 में ही भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (IES) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर ली थी. इसके बाद वे रक्षा मंत्रालय के अधीन बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) में एक क्लास वन अधिकारी के रूप में तैनात थे. लेकिन प्रशासनिक सेवा में जाने का उनका सपना हमेशा जीवित रहा. अमन भारतीय वन सेवा में जाने की इच्छा रखते थे. अपने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्होंने साल 2024 में सुरक्षित और प्रतिष्ठित नौकरी से इस्तीफा दे दिया और पूरी तरह तैयारी में जुट गए.
साहिबगंज में की पढ़ाई, घर को बनाया ‘स्टडी सेंटर’
अमन की इस सफलता में साहिबगंज के डीएफओ प्रबल कुमार का विशेष मार्गदर्शन रहा. इस दौरान डीएफओ (DFO) प्रबल का उन्हें लगातार मार्गदर्शन मिलता रहा. अमन की सफलता की खबर मिलते ही उनके पिता ओम प्रकाश तिवारी और मां सुधा तिवारी की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े. अमन जैसे युवाओं की सफलता समाज के लिए एक नई उम्मीद लेकर आती है. अमन ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के आशीर्वाद और निरंतर मेहनत को दिया है. वे झारखंड के उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं जो संसाधनों की कमी के बावजूद यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं.
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