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बरसात में बकरियों को भीगने देना भारी पड़ सकता है. बालोद पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक डॉ. डी. के. सिहारे ने बताया कि इस मौसम में एंटरोटॉक्सिमिया का खतरा बढ़ जाता है. बचाव के लिए विभाग केवल ₹5 पंजीयन शुल्क पर निशुल्क टीकाकरण कर रहा है. समय पर कृमिनाशक दवा और शुरुआती लक्षण दिखते ही इलाज कराना जरूरी है.
बरसात का मौसम बकरी पालन के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण समय माना जाता है. इस दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी बकरियों की सेहत पर भारी पड़ सकती है और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग ने बकरी पालकों को सावधानी बरतने की सलाह देते हुए बताया है कि बारिश के मौसम में कुछ सामान्य गलतियों से बचकर बकरियों को गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सकता है.
बालोद पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग के उपसंचालक डॉ. डी. के. सिहारे ने बताया कि बरसात के दिनों में बकरियों में एंटरोटॉक्सिमिया होने का खतरा काफी बढ़ जाता है. इस बीमारी के कारण बकरियों में पानी जैसे पतले दस्त, नाक बहना, सर्दी और खांसी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. यदि समय पर इलाज और बचाव नहीं किया गया तो यह बीमारी पशुपालकों के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकती है.
बरसात में बकरियां पड़ सकती हैं बीमार
विभाग की ओर से इस बीमारी की रोकथाम के लिए निशुल्क टीकाकरण किया जा रहा है. इसके लिए पशुपालकों को केवल 5 रुपये का पंजीयन शुल्क देना होता है. बालोद जिले में जहां-जहां बकरी पालन किया जा रहा है, वहां विभाग की टीम पहुंचकर टीकाकरण अभियान चला रही है. ऐसे में सभी बकरी पालकों को अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण अवश्य कराना चाहिए. डॉ. सिहारे के अनुसार, बरसात में सबसे बड़ी गलती बकरियों को बारिश में भीगने देना है. लगातार भीगने से बकरियों को सर्दी और खांसी होने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए कोशिश करें कि तेज बारिश के दौरान बकरियों को चराने के लिए बाहर न ले जाएं और उन्हें सूखे एवं सुरक्षित स्थान पर रखें.
5 रुपये में ट्रीटमेंट
बारिश के मौसम में नई घास के साथ कृमि (कीड़े) के अंडे भी बकरियों के शरीर में पहुंच जाते हैं. इससे बकरियां कमजोर होने लगती हैं और उनका विकास प्रभावित होता है. इस समस्या से बचने के लिए समय-समय पर कृमिनाशक दवा देना बेहद जरूरी है.उपसंचालक डॉ. सिहारे ने कहा कि यदि किसी बकरी में पानी जैसे पतले दस्त, नाक बहना और लगातार खांसी के लक्षण दिखाई दें तो इसे सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज न करें. यह एंटरोटॉक्सिमिया का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें. यदि बीमारी की पुष्टि हो जाती है तो सामान्य एंटीबायोटिक और सर्दी-खांसी की दवाओं से इसका उपचार संभव है, लेकिन इलाज में देरी नुकसान बढ़ा सकती है.