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बोकारो के दुर्गा चरण महथा ने पांचवें प्रयास में इसरो (ISRO) की परीक्षा पास की है. वे एक साधारण किसान के बेटे हैं. सेना में कम हाइट के कारण उनका चयन नहीं हो सका था. इसके बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने नौकरी के साथ रोजाना 8-10 घंटे कड़ी पढ़ाई की और यह बड़ी सफलता हासिल की.
बोकारोः कहते हैं ‘लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’. इस कहावत को सच कर दिखाया है बोकारो जिले के चंदनक्यारी प्रखंड अंतर्गत सुदूर गांव सिमुलिया के रहने वाले दुर्गा चरण महथा ने. जिन्होंने पांचवें प्रयास में भारत की प्रतिष्ठित अंतरिक्ष संस्था इसरो कि LPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर पूरे जिले का नाम रोशन किया है. उनकी इस सफलता से गांव और आसपास के इलाके में खुशी और हर्ष का माहौल है.
लोकल 18 से खास बातचीत में दुर्गा चरण महथा ने बताया कि बचपन से उनका सपना देश सेवा करने का था. वह भारतीय सेना में जाना चाहते थे, लेकिन कम हाइट के कारण उन्होंने सेना में भाग नहीं लिया, इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अब इसरो के माध्यम से देश सेवा करने का अवसर मिला है.
दुर्गा चरण ने आगे बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने का सफर बेहद संघर्षपूर्ण और दिलचस्प रहा है. उन्होंने बताया कि साल 2022 में जब उनका चयन रेलवे ग्रुप डी में नहीं हुआ, तो वह काफी निराश हुए इसके बाद वह काम की तलाश में बेंगलुरु चले गए, जहां उन्हें एक पीजी में मैनेजर की नौकरी मिल गई.
मैनेजर की नौकरी के दौरान उन्हें दिन में काफी समय मिल जाता था और खाली समय में वह यूट्यूब पर पढ़ाई से जुड़े वीडियो देखा करते थे. इसी दौरान यूट्यूब पर ही उन्होंने इसरो से जुड़े कुछ वीडियो देखा, जिसने उनके भीतर एक नई ऊर्जा पैदा कर दी और उस वीडियो से प्रेरित होकर उन्होंने ठान लिया कि अब यही उनकी मंजिल है वह नौकरी छोड़ वापस अपने गांव लौट आए और पूरी लगन से तैयारी में जुट गए.
रोजाना 8-10 घंटे पढ़ाई
गांव लौटकर दुर्गा चरण ने यूट्यूब वीडियो और सेल्फ स्टडी को अपना हथियार बनाया वह रोजाना 8 से 10 घंटे कड़ी पढ़ाई करते थे और साल 2022 के बाद से उन्होंने इसरो की परीक्षा देनी शुरू की. कई बार वह लिखित परीक्षा पास कर लेते, लेकिन इंटरव्यू के स्टेज पर जाकर छट जाते थे. लगातार मिल रही असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और ऐसे में उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और उन पर काम करना शुरू किया. आईटीआई के ईसीएस इंजीनियरिंग ड्राइंग और टेक्निकल थ्योरी के क्षेत्रों में अपनी पकड़ को मजबूत किया. आखिरकार, उनके 5 सालों के कठिन परिश्रम और अटूट विश्वास का फल उन्हें 2026 में मिला, जब उन्होंने इसरो कि LPSC परीक्षा मे सफलता हसील की.
अपनी सफलता को लेकर दुर्गा चरण कहते हैं कि लगातार असफलता मिलने से इंसान मानसिक रूप से टूट जाता है, लेकिन उनकी पत्नी विभा देवी ने हर कठिन समय में उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में बताते हुए दुर्गा चरण ने कहा कि उनके पिता अरुण महथा एक साधारण किसान हैं, जबकि माता मीरा देवी गृहिणी हैं उनका परिवार बेहद साधारण आर्थिक स्थिति से आता है. उनकी पत्नी विभा देवी एक निजी स्कूल में इंग्लिश टीचर हैं और कठिन समय में उन्होंने परिवार और पढ़ाई दोनों में उनका पूरा साथ दिया.
माता-पिता ने क्या कहा?
दुर्गा चरण की सफलता पर उनके पिता अरुण महथा ने कहा कि उन्होंने काफी संघर्षों के साथ अपने बेटे को पढ़ाया है. आज बेटे की सफलता से बेहद खुश हैं. वहीं, उनकी पत्नी विभा देवी ने कहा कि लंबे संघर्ष और मेहनत के बाद यह सफलता मिली है, जिससे पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है.
BIT Sindri से पढ़ाई
दुर्गा चरण ने अपनी शुरुआती पढ़ाई हाई स्कूल सिमुलिया से पूरी की इसके बाद उन्होंने इंटर की पढ़ाई चंद्रा कॉलेज और आईटीआई फिटर ट्रेड की पढ़ाई BIT Sindri से पूरी की. अंत में उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि यदि छात्र टेक्निकल बैकग्राउंड से आते हैं, तो उन्हें टेक्निकल परीक्षाओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए उनका कहना है कि टेक्निकल परीक्षाओं का सिलेबस सीमित होता है और इसमें सफलता की संभावना भी अधिक रहती है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.