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सॉकपिट-नाडेप घोटाला: 4 स्वयं सहायता समूहों को ‌



भास्कर न्यूज |दुमका दुमका के जामा प्रखंड में सोकपीट और नाडेप निर्माण के नाम पर फर्जी तरीके से सरकारी राशि निकालने के मामले में जिला प्रशासन ने आखिरकार एक साल बाद कार्रवाई शुरू की है। जिला जल एवं स्वच्छता समिति, दुमका ने चार स्वयं सहायता समूहों को 30 मई तक कुल ₹13,36,778 की राशि वापस करने का नोटिस दिया है। अखबार में नोटिस छपवाकर समिति ने चेतावनी दी है कि समय-सीमा में राशि न लौटाने पर संबंधित समूहों के पदाधिकारियों के खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी और समूहों को काली सूची में डाला जाएगा। यह मामला नया नहीं है। 16 मई 2025 को इस घोटाले को उजागर किया था। जामा प्रखंड के भटनिया गांव के ग्राम प्रधान मसोदी हांसदा और लखना गांव की जल सहिया मरियम टुडू ने ग्रामीणों के साथ दुमका के उपायुक्त को आवेदन देकर अनियमितता की शिकायत की थी। उनका आरोप था कि बिना सोकपीट व नाडेप बनवाए ही पैसों की निकासी कर ली गई।आरटीआई के जरिए भी खुलासा हुआ था कि कागजों पर काम दर्शाया गया, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि प्रखंड कार्यालय जामा एवं पेयजल व स्वच्छ प्रमंडल संख्या-2 के अधिकारियों की मिलीभगत से झूठी जानकारी देकर योजना की राशि का गबन किया गया। जांच में समिति ने पाया कि जामा और रामगढ़ प्रखंड के चार एसएचजी ने बिना कोई वास्तविक निर्माण कार्य किए सोकपीट और नाडेप निर्माण के नाम पर भुगतान ले लिया। समिति ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता करार देते हुए वसूली नोटिस जारी किया है। 30 मई तक नहीं लौटाई राशि] तो प्राथमिकी समिति ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित तिथि तक राशि वापस न होने पर संबंधित समूहों के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष पर नजदीकी थाने में प्राथमिकी दर्ज होगी, प्रमाण-पत्र केस चलाया जाएगा और समूहों को स्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। केंद्र व झारखंड सरकार द्वारा संचालित इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के लिए सोकपीट (अपशिष्ट जल निकासी गड्ढा) और नाडेप (जैविक खाद निर्माण संरचना) बनाए जाते हैं। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग निगरानी करता है। प्रारंभिक जांच के बाद प्रशासन सख्त, दिया नोटिस: कार्यपालक अभियंता जिला प्रशासन द्वारा कराई गई प्रारंभिक जांच में इन चार एसएचजी समूह द्वारा गड़बड़ी का मामला सामने आया है जिसके बाद इन समूहों को नोटिस दिया गया है। यह लोग भी अपना पक्ष तथ्यों के साथ रख सकते हैं। उसके बाद अग्रतार कार्रवाई की जाएगी। रमेश कुमार लोहरा,कार्यपालक अभियंता



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