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दूसरे विश्वविद्यालयों में भी पेमेंट की जांच शुरू झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों की परीक्षा व्यवस्था में करोड़ों रुपए की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। वित्त विभाग की स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन कार्यों के लिए राज्य सरकार पहले से चांसलर पोर्टल की व्यवस्था लागू कर चुकी थी, उन्हीं कार्यों के लिए एक बाहरी एजेंसी को भुगतान किया गया। रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच और उनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। रिपोर्ट राज्यपाल सचिवालय को भेज दी गई है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार अकेले नीलांबर पीतांबर यूनिवर्सिटी (एनपीयू) में 2,68,73,790 रुपए के भुगतान का गबन हुआ है। रिपोर्ट के बाद अब अन्य विश्वविद्यालयों में भी चांसलर पोर्टल से होने वाले कार्यों के लिए एजेंसियों को किए गए भुगतान का आकलन शुरू हो गया है। विश्वविद्यालयों में परीक्षा से जुड़े कार्य नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के माध्यम से कराए जाते हैं। जानिए…क्या कहती है ऑडिट रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने वर्ष 2018-19 से सभी सरकारी विश्वविद्यालयों में चांसलर पोर्टल लागू किया था। एनआईसी, रांची ने राज्यपाल के निर्देश पर यह पोर्टल विकसित किया था। पोर्टल का उद्देश्य प्रवेश, रजिस्ट्रेशन, परीक्षा, परिणाम और डिग्री से जुड़ी प्रक्रियाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित करना था। इसके लिए विश्वविद्यालयों को प्रशिक्षण दिया गया था और एनआईसी के तकनीकी प्रतिनिधि भी तैनात किए गए थे। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्वविद्यालयों ने पोर्टल का उपयोग मुख्य रूप से ऑनलाइन प्रवेश और रजिस्ट्रेशन तक सीमित रखा। परीक्षा से संबंधित कार्य एक बाहरी एजेंसी के माध्यम से कराए गए। आपत्ति:चांसलर पोर्टल के कार्य भी एजेंसी से कराए
रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय और एजेंसी के बीच हुए एकरारनामे में उन कार्यों को भी शामिल किया गया, जो चांसलर पोर्टल के माध्यम से किए जाने थे। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि इन्हीं कार्यों के लिए एजेंसी को भुगतान किया गया। रिपोर्ट में इसे वित्तीय अनियमितता बताते हुए संबंधित भुगतान पर आपत्ति दर्ज की गई है। परीक्षा नियंत्रक को आपत्ति जताने पर हटाया
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक डॉ. रविशंकर ने एजेंसी के बिलों पर आपत्ति दर्ज की थी। इसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यपाल की स्वीकृति के बिना डॉ. अजित कुमार सेठ को परीक्षा नियंत्रक नियुक्त किया गया और उनके स्तर से एजेंसी के बिलों का भुगतान स्वीकृत किया गया।
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