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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में कहा कि दुनिया की सभी समस्याएं दूसरों के प्रति अपनापन और आत्मीयता की कमी से पैदा होती हैं. उन्होंने कहा कि ‘मैं’ और ‘मेरा’ की सोच से ऊपर उठकर ‘हर कोई हमारा अपना है’ की भावना विकसित करनी होगी. समर्पण फाउंडेशन की रजत जयंती के कार्यक्रम में भागवत ने सेवा, संवेदनशीलता और करुणा की अहमियत पर भी बात की.
नागपुर में समर्पण फाउंडेशन की रजत जयंती कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सेवा, संवेदनशीलता और करुणा की अहमियत पर भी बात की. (फाइल फोटो/ PTI)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने 7 नवंबर को कहा कि दुनिया की सभी समस्याएं दूसरों के प्रति अपनापन या आत्मीयता न होने की वजह से पैदा होती हैं. उन्होंने कहा कि समाज और दुनिया में शांति और कल्याण के लिए यह भावना विकसित करना जरूरी है कि ‘हर कोई हमारा अपना है’. मोहन भागवत नागपुर में सामाजिक सेवा संगठन ‘समर्पण फाउंडेशन’ की रजत जयंती यानी 25वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने अपनापन, संवेदनशीलता और सेवा की भावना को लेकर अपनी बात रखी.
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि अपनापन पूरी दुनिया को आपस में जोड़ता है. यही भावना समस्याओं को पहचानने और उनके समाधान का रास्ता सुझाने में भी मदद करती है. उन्होंने कहा कि दुनिया की तमाम समस्याएं अपनापन या आत्मीयता की कमी से पैदा होती हैं. भागवत ने हाल ही में सम्मेलन के लिए अपनी अमेरिका यात्रा का भी जिक्र किया. उन्होंने नाइजीरिया के एक वक्ता की बात दोहराते हुए कहा कि देखिए, जब तक ‘मैं और मेरा’ की भावना खत्म नहीं होती, तब तक दुनिया में शांति नहीं आ सकती. उन्होंने इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि दुनिया की सभी समस्याएं कहीं न कहीं ‘मैं’ और ‘मेरा’ की सोच से जुड़ी हैं.
‘मैं’ और ‘मेरा’ से ऊपर उठने की जरूरत
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि ‘मैं’ और ‘मेरा’ की सोच से ऊपर उठने के लिए लोगों को यह भावना विकसित करनी होगी कि हर कोई हमारा अपना है. उन्होंने कहा कि जैसे हम अपने लिए अच्छा चाहते हैं, वैसे ही हमें दूसरों के भी अच्छे से रहने की कामना करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ये एक विशेष दृष्टिकोण है. इसे अपनाकर सभी का कल्याण सुनिश्चित किया जा सकता है.
इंसान के स्वभाव में है सेवा की भावना
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि इंसान स्वभाव से ही दयालु होता है और इसी वजह से उसने सेवा की भावना को अपनाया है. उन्होंने कहा कि सेवा दिखावे के लिए नहीं, बल्कि चुपचाप और लगातार की जानी चाहिए. उन्होंने कोविड-19 महामारी के समय के अनुभव को भी याद किया. भागवत ने बताया कि जब उन्होंने नागपुर में आरएसएस कार्यकर्ताओं से सेवा कार्यों के बारे में जानकारी मांगी थी, तब उन्हें पता चला कि दो महीनों के भीतर ऐसे 40 कार्य किए गए थे. उन्होंने कहा कि इन सेवा कार्यों में ‘समर्पण फाउंडेशन’ भी शामिल था.
संवेदनशीलता और करुणा इंसान को अलग बनाती है
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि इंसानों और जानवरों के बीच एकमात्र अंतर उनकी संवेदनशीलता और करुणा है. उन्होंने कहा कि संवेदनशील होने के कारण इंसान दूसरों की परवाह करते हैं. वे सिर्फ अपने जीवन की नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन की भी चिंता करते हैं. मोहन भागवत ने कहा कि सेवा करना इंसानों का एक स्थायी स्वभाव है. उन्होंने कहा कि भले ही दुनिया में कोई भी व्यक्ति कष्ट में न हो, फिर भी इसमें कोई संदेह नहीं है कि इंसान किसी न किसी रूप में सेवा कार्य करते रहेंगे.