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कचहरी रोड में फर्जी गवाहों के सिंडिकेट का भास्कर ने किया पर्दाफाश दुष्कर्म मामले में 10 हजार, मर्डर केस में 5 हजार और दहेज प्रताड़ना मामले में 1000 रुपए। यह है कोर्ट में झूठी गवाही देने वालों का रेट कार्ड। भास्कर ने काल्पनिक शिकायतवाद व काल्पनिक केस का उल्लेख करते हुए झूठी गवाही देने वाले ऐसे ही गिरोह का पर्दाफाश किया। यह गिरोह पैसे लेकर शिकायतवाद के मामले में ‘अन्य’ गवाह के रूप में झूठी गवाही देने को तैयार मिले। हैरान करने वाली बात यह है कि ये हत्या-दुष्कर्म जैसे संगीन मामले में भी फर्जी गवाह बनने को तैयार थे। स्टेट बार काउंसिल के सदस्य जीतेंद्र कुमार बताते हैं कि हत्या-दुष्कर्म जैसे मामलों में यह तभी संभव है, जब सुनवाई के दौरान दोनों में से कोई पक्ष अन्य गवाह (जिसका जिक्र केस डायरी या चार्जशीट में न हो) पेश करने की अनुमति मांगे। भास्कर स्टिंग में वो तीन चेहरे कैमरे में कैद हुए, जो पैसे लेकर किसी भी शिकायतवाद मामले में झूठी गवाही देने को तैयार थे। भास्कर ने सबसे पहले प्रकाश कुमार से बात की तो उसने महेंद्र नामक व्यक्ति से मिलाया। महेंद्र हत्या के केस में पांच हजार रु. लेकर झूठी गवाही देने को तैयार हो गया। फिर रिपोर्टर ने एक फर्जी गवाह जफर अंसारी (मिट्ठू) से दुष्कर्म मामले में गवाही की बात की। उसने पिंकी तिर्की का नाम लिया। कहा-वह 10 हजार रु. लेती है। महिला से मिलाने की एवज में उसने 1000 रु. की मांग की। पिंकी भी 10 हजार रु. में गवाही को तैयार हो गई। फिर भास्कर ने लल्लू उर्फ जुनैद अंसारी से बात की तो वह दहेज उत्पीड़न मामले में 1000 रु. में गवाही देने को तैयार था। भास्कर का स्टिंग का मकसद ऐसे फर्जी गवाह को बेनकाब करना है, जो सुसंगठित तरीके से इसे पेशा बना चुका है। मुकदमों के हिसाब से ‘सौदा’: यह है फर्जी गवाहों का ‘रेट कार्ड’ दुष्कर्म केस: 10 से 12 हजार
मर्डर केस:5 से 10 हजार
दहेज उत्पीड़न केस: 1 से 5 हजार
जमीन विवाद: 1 से 2 हजार
छिनतई: 1 से 2 हजार
चोरी: 1 हजार
मारपीट: 500 से 1000 रु.। केस के नेचर के आधार पर रकम घटती-बढ़ती है। कैमरे में बेनकाब हुआ फर्जी गवाह सिंडिकेट
रिपोर्टर हत्या के एक काल्पनिक केस में गवाही के लिए महेंद्र सिंह से मिला। वह पैसे लेकर गवाही देने को तुरंत तैयार हो गए। तीन बार कोर्ट जाना पड़ता है, रिस्क ज्यादा है, इसलिए 5000 रुपए लगेंगे
रिपोर्टर : एक केस में गवाही देनी है, कैसे होगा?
महेंद्र : क्या केस है? कब घटना हुई थी?
रिपोर्टर: मर्डर का केस है। पिछले साल हुआ था।
महेंद्र : किस कोर्ट में है? किस तारीख को है?
रिपोर्टर: वो मैं आपको बाद में बता दूंगा?
महेंद्र : ठीक है, हो जाएगा। लेकिन मोटा खर्च लगेगा। 5000 रुपए?
रिपोर्टर: बहुत ज्यादा है। कुछ कम कीजिए?
महेंद्र : तीन बार कोर्ट चढ़ना होगा। रिस्क ज्यादा है, इसलिए इतने पैसे लेते हैं।
रिपोर्टर: ठीक है, बताता हूं। रिपोर्टर तमाड़ इलाके के एक काल्पनिक दुष्कर्म के केस को लेकर गवाही के लिए पिंकी तिर्की से मिला। वह भी तैयार हो गई।
10 हजार रुपए लगेंगे, इन सब मामलों में ज्यादा मत सोचिए
रिपोर्टर: एक केस में गवाही देनी है? क्या हो पाएगा?
पिंकी : क्या केस है? कहां का है?
रिपोर्टर : दुष्कर्म का केस है, तमाड़ इलाके का।
पिंकी : क्या बोलना होगा?
रिपोर्टर : वो मेरा वकील आपको समझा देगा।
पिंकी : ठीक है, मेरा खर्च देख लीजिएगा?
रिपोर्टर : कितना है?
पिंकी : सर (मिट्ठू) ने बताया ही होगा?
रिपोर्टर : आप भी बता दीजिए, कितना देना होगा?
पिंकी : 10 हजार रुपए।
रिपोर्टर : कुछ कम कीजिए…सर ने आपसे मिलवाने का पहले ही 1000 रुपए ले लिया है।
पिंकी : उतना ही लगेगा। इन सब मामलों में ज्यादा नहीं सोचिए। 1000 रुपए दीजिए…कब गवाही देनी है, बताइएगा
रिपोर्टर दहेज उत्पीड़न के काल्पनिक केस को लेकर लल्लू उर्फ जुनैद अंसारी से मिला। गवाह के बारे में बात की तो वह तैयार था।
रिपोर्टर: दहेज उत्पीड़न के एक केस में गवाही देनी है। हो पाएगा?ो
लल्लू : बिना संकोच किए…हो जाएगा।
रिपोर्टर: कितना पैसा देना होगा?
लल्लू : 1000 रुपए देना होगा। कब गवाही देनी है, बताइएगा। इसलिए बेखौफ है सिंडिकेट
1. गवाहों के सत्यापन और बायोमेट्रिक डेटाबेस न होना: कोर्ट के पास ऐसा कोई विटनेस डेटाबेस नहीं होता, जो ट्रैक कर सके कि वह व्यक्ति पहले भी किसी मामले में गवाही दे चुका है। इसका लाभ उठाकर गिरोह फर्जी नाम-पते पर जाली आधार कार्ड बनवा लेते हैं और आसानी से बच निकलते हं।
2. बिचौलियों पर निगरानी का अभाव: अदालत परिसर में बाहरी तत्वों की आवाजाही को लेकर सख्त नियम नहीं है। इससे प्रकाश जैसे बिचौलिए खुलेआम घूम रहे हैं। बिना किसी डर के झूठी गवाही की सौदेबाजी कर रहे हैं। झूठी गवाही पर ये है सजा
कोर्ट रूम में जज के सामने झूठी गवाही देने पर सात साल तक की कैद या 10 हजार रुपए जुमाना हो सकता है।
हत्या जैसे मामले में, जिसमें फांसी की सजा हो सकती है, उसमें झूठी गवाही पर उम्रकैद या 10 साल की सजा संभव है।
दुष्कर्म जैसे मामले में, जिसमें दोषी को उम्रकैद हो सकती है, उसमें झूठी गवाही देने वालों को भी उम्रकैद संभव है।
धनबाद बार एसोसिएशन के महासचिव व स्टेट बार काउंसिल सदस्य जीतेंद्र कुमार से बातचीत पर आधारित) फर्जी गवाहों की पहचान मुश्किल
यहां केस के सिलसिले में रोज हजारों लोग आते हैं। ऐसे में झूठी गवाही देने वाले या दलालों की पहचान करना मुश्किल है। कोई साक्ष्य मिलता है तो जरूर कार्रवाई की जाएगी। झूठी गवाही देने या कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सजा का भी प्रावधान है। -संजय कुमार विद्रोही, सचिव, बार एसोसिएशन, रांची सिविल कोर्ट
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