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हर पेड़ से लाखों की कमाई! देवघर में आम बागवानी का ये...


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खेत में इस ट्रिक से तैयार करें आम का बगीचा, हर पेड़ बनेगा कमाई की मशीन!

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Deoghar Mango Farming Tips: देवघर में आम की बागवानी से किसानों की आमदनी बढ़ रही है. कृषि विशेषज्ञ अम्बिका कुशवाहा ने जून-जुलाई में लंगड़ा, मालदा, आम्रपाली जैसे किस्में लगाने की सलाह दी है. इस वैरायटी के आम से किसान बंपर कमाई कर सकते हैं.

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देवघर: झारखंड का देवघर जिला सिर्फ बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए ही नहीं, बल्कि स्वादिष्ट आमों के लिए भी काफी प्रसिद्ध  है. यहां की जलवायु और मिट्टी आम की खेती के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है. यही कारण है कि खेती-किसानी के साथ-साथ आम बागवानी भी किसानों के लिए मुनाफे का एक शानदार जरिया बनती जा रही है. अगर सही समय पर सही किस्म के पौधे लगाए जाएं और उनकी देखभाल सही तरीके से की जाए, तो किसान कुछ ही वर्षों में अच्छा उत्पादन लेकर बेहतर कमाई कर सकते हैं. खासकर देवघर जैसे इलाके में आम की खेती किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का काम कर रही है.

जानें क्या कहते हैं कृषि एक्सपर्ट

देवघर के कृषि विशेषज्ञ अम्बिका कुशवाहा ने बताया कि आम का बगीचा तैयार करने से पहले मिट्टी और जलवायु को समझना बेहद जरूरी होता है. किसी भी फसल की तरह आम की खेती में भी सही जमीन का चयन सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है. आम के पौधे ऐसी मिट्टी में ज्यादा अच्छे से बढ़ते हैं. जहां पानी का जमाव नहीं होता है. हल्की दोमट मिट्टी और अच्छी जल निकासी वाली जमीन आम की खेती के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है. अगर मिट्टी उपजाऊ हो और समय-समय पर जैविक खाद का उपयोग किया जाए तो पौधे तेजी से बढ़ते हैं और फलन भी बेहतर होता है.

जून जुलाई का महीना है सबसे उत्तम

उन्होंने बताया कि जून और जुलाई का महीना आम बागवानी के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है. इस दौरान मानसून की शुरुआत हो जाती है और मिट्टी में नमी बनी रहती है, जिससे नए पौधों को बढ़ने में काफी मदद मिलती है. देवघर की जलवायु ज्यादातर गर्म और आद्र रहती है. यहां साल के अधिकतर महीने तापमान गर्म रहता है और केवल कुछ महीनों तक ठंड पड़ती है. यही वजह है कि यहां लंगड़ा और मालदा जैसी किस्मों का उत्पादन काफी अच्छा होता है. इस आम की सबसे खास बात यह है कि देवघर की मिट्टी में उगने वाले मालदो आम का स्वाद बेहद मीठा और रसीला होता है. यही कारण है कि यहां के आमों की मांग उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली समेत कई राज्यों में रहती है और बड़े स्तर पर इसकी सप्लाई भी की जाती है.

इस विधि से लगाएं आम की बागवानी

आम लगाने की विधि पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी होता है. पौधों को हमेशा सीधी लाइन में लगाना चाहिए और पौधों के बीच पर्याप्त दूरी जैसे 10×10 रखनी चाहिए. दूरी कम होने पर पेड़ों को फैलने के लिए जगह नहीं मिलती, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है. उचित दूरी होने पर पेड़ों को हवा और धूप अच्छी तरह मिलती है, जिससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और फल भी अच्छी गुणवत्ता के आते हैं. साथ ही समय-समय पर सिंचाई, खाद और कीटनाशक का उपयोग भी जरूरी माना जाता है.

इस आम की वेरायटी बेहतर

वहीं, अगर कोई व्यक्ति अपने घर या किचन गार्डन में सिर्फ एक-दो आम के पौधे लगाकर ताजे आम का आनंद लेना चाहता है तो उसके लिए आम्रपाली किस्म सबसे बेहतर माना जाता है. यह पौधा कम जगह में भी आसानी से बढ़ जाता है और करीब 2-3 साल में फल देना शुरू कर देता है. ऐसे में लोग अपने घर के आंगन या छत पर भी आम का पौधा लगाकर ताजे और मीठे आम का स्वाद ले सकते हैं. कुल मिलाकर सही जानकारी, सही समय और सही किस्म का चयन करके आम बागवानी किसानों के लिए मुनाफे का बेहद शानदार सौदा साबित हो सकती है.



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