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हाईकोर्ट ने तथ्य छुपाने पर प्रार्थी को जारी किया अवमानना नोटिस




मधुकम खादगढ़ा में जमीन के बदले 1.8 करोड़ लेने के आरोपी को फटकार
रांची | झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुखदेवनगर थाना के पीछे मधुकम खादगढ़ा में 12 घरों को तोड़ने के मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने मुंडारी प्रकृति की जमीन पर बने 12 घरों को तोड़े जाने से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए प्रार्थी द्वारा तथ्य छुपाने पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने प्रार्थी महादेव उरांव को गलत तथ्य पेश कर कोर्ट को गुमराह करने पर अवमानना का नोटिस जारी किया है। अदालत ने महादेव उरांव को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना के साथ अन्य आपराधिक कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। अदालत ने 19 जून तक इसका जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही मामले में पूर्व में पीड़क कार्रवाई नहीं करने के आदेश को अदालत ने बरकरार रखा है। मालूम हो कि जिला प्रशासन ने मुंडारी प्रकृति की जमीन पर बने 12 घरों पर बुल्डोजर चला दिया था। जबकि, महादेव उरांव ने उसी जमीन के बदले भवन मालिकों से करीब 1.08 करोड़ रुपए ले लिये थे। उसने हाईकोर्ट से भी इस तथ्य को छुपाया। कोर्ट की सख्ती से भयादोहन पर लगी रोक हाईकोर्ट की सख्ती से रांची में आदिवासी जमीन लेकर घर बनाने वाले हजारों लोगों के भयादोहन पर तत्काल रोक लगी है। क्योंकि, आदिवासी जमीन लेने वालों से जमीन मालिक और ब्रोकर कई बार पैसे वसूलते हैं। पूरा पैसा लेने के बाद रांची के एसएआर कोर्ट में जमीन वापसी का केस कर दिया जाता है। दखल दिहानी का आदेश पारित होते ही फिर वसूली शुरू हो जाती है।



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