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हाईकोर्ट ने पूछा-जांच में ऐसा क्या मिला:अब सीजीएल-सीडीपीओ की नियुक्ति रद्द करने...




झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जेएसएससी सीजीएल और बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) की नियुक्ति रद्द करने के सरकार के आदेश पर रोक लगा दी। इससे सीजीएल पास 1932 और 64 सीडीपीओ को बड़ी राहत मिली है। अब वे पहले की तरह काम कर सकेंगे। जस्टिस दीपक रोशन की कोर्ट ने सरकार से पूछा कि सीआईडी जांच में ऐसा क्या मिला, जिसके आधार पर नियुक्ति रद्द करने की जरूरत पड़ी। सरकार सात सितंबर तक शपथ पत्र के माध्यम से बताए। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। इससे पहले सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से वरीय अधिवक्ता इन्द्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स, प्रेरणा झुनझुनवाला ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने रातोंरात प्रार्थियों को बेरोजगार कर दिया। जब भी नियमित नियुक्ति होती है तो संबंधित कर्मचारी-पदाधिकारी को नौकरी से हटाने के लिए निहित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। उनका पक्ष भी सुना जाता है। लेकिन सरकार ने न तो मामले की जांच पूरी होने का इंतजार किया, न किसी को नोटिस दिया और न उनका पक्ष सुना। अचानक नियुक्ति रद्द करने की अधिसूचना जारी कर दी गई। यह नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें उनकी नियुक्ति अंतिम परिणाम से प्रभावित होने की बात कही गई थी। कोर्ट को बताया गया कि जांच में ऐसा कौन सा तथ्य सामने आया है, जिसके आधार पर सरकार ने मान लिया है कि सभी अभ्यर्थी गड़बड़ी में शामिल थे। यह तो ट्रायल के अंतिम आदेश से प्रभावित होगा। ऐसे में गड़बड़ी की बात कहते हुए नियुक्ति रद्द करने का आदेश असंवैधानिक है। वह सबकुछ जो आपको जानना जरूरी है सरकार के आग्रह पर फास्ट ट्रैक मोड में अब रोजाना होगी मामले की सुनवाई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीर बताया। सरकार की ओर से इस मामले को फास्ट ट्रैक मोड पर सुनवाई करने का आग्रह किया गया। अदालत ने आग्रह स्वीकार करते हुए कहा कि इस मामले की रोजाना सुनवाई होगी, ताकि जल्द फैसला सुनाया जा सके। अदालत ने राज्य सरकार को और प्रार्थियों को निर्धारित समय-सीमा के अंदर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए मांगा समय़ राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहतिश्य राय ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सभी याचिका पिछले दिनों ही दाखिल हुई है और इस पर तत्काल सुनवाई की जा रही है। सरकार को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त समय नहीं मिल रहा है। मामले की सुनवाई के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। इस पर अदालत ने 7 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। – अमृतांश वत्स, अधिवक्ता, हाईकोर्ट सीजीएल-सीडीपीओ की नौकरी सुरक्षित, पर सभी को देना होगा अंडरटेकिंग अब सीजीएल व सीडीपीओ का क्या होगा? हाईकोर्ट ने परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है। अब सीजीएल से नियुक्त सभी 1932 अफसर और 64 सीडीपीओ की नौकरी फिलहाल सुरक्षित है। क्योंकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ताओं के साथ-साथ समान रूप से प्रभावित सभी चयनित कर्मियों को मामले के अंतिम निपटारे तक काम पर बने रहने दिया जाए। हालांकि, उन्हें एक अंडरटेकिंग देना होगा कि भविष्य में ट्रायल कोर्ट का फैसला उन पर लागू होगा। {क्या इससे उन सभी 22 परीक्षा के अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी, जिन्हें रद्द कर दिया गया है? अदालत के रोक लगाने के बाद सरकार का आदेश निष्प्रभावी हो गया है। जेपीएससी सिविल सेवा 11वीं-13वीं, फूड सेफ्टी ऑफिसर, जेपीएससी सीजीएल और सीडीपीओ पूर्व की तरह नौकरी करेंगे। हालांकि, अदालत के अंतिम आदेश से इनकी नियुक्ति प्रभावित होगी। अन्य परीक्षाओं के तहत नियुक्ति नहीं हुई है। इसलिए उन परीक्षाओं में शामिल अभ्यर्थियों को राहत नहीं मिलेगी। {क्या अन्य अभ्यर्थियों को भी कोर्ट जाना होगा? हां, सभी अभ्यर्थियों को कोर्ट जाना होगा। क्योंकि अदालत ने सभी को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले में अन्य याचिकाएं भी अदालत में दाखिल हुई हैं। अदालत ने सभी याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। इस पर 24 अगस्त को सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान सहायक वन संरक्षक की नियुक्ति का मामला भी अदालत में आया है। इस पर आगे सुनवाई होगी।



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