भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

हेग कोर्ट का फैसला सिर्फ ‘नाटक’, सिंधु जल संधि पर भारत का...


होमताजा खबरदेश

हेग कोर्ट का फैसला सिर्फ ‘नाटक’, सिंधु जल संधि पर भारत ने पाकिस्तान को लताड़ा

Last Updated:

भारत ने कोर्ट के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है. ठीक उसी तरह जैसे उसने इससे पहले तथाकथित CoA द्वारा दिए गए सभी निर्णयों और टिप्पणियों को दृढ़ता से अस्वीकार किया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने कभी भी इस तथाकथित CoA की स्थापना को मान्यता नहीं दी है. इसके द्वारा चलाई गई कोई भी कार्यवाही, दिया गया कोई भी फैसला या निर्णय शून्य और अमान्य है. सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का निर्णय प्रभावी बना रहेगा.

ख़बरें फटाफट

हेग कोर्ट का फैसला सिर्फ 'नाटक', सिंधु जल संधि पर भारत ने पाकिस्तान को लताड़ाZoom

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि रद्द कर दिया था. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. भारत ने सिंधु जल संधि से जुड़े तथाकथित न्यायाधिकरण यानी ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ (सीओए) को एक बार फिर अवैध करार देते हुए उसके फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर शनिवार को एक आधिकारिक बयान जारी किया. बाद में आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘एक्स’ पर कहा कि भारत ने इस तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय को कभी कानूनी मान्यता नहीं दी और उसके किसी भी निर्णय, कार्यवाही या आदेश का भारत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता.

दरअसल, पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में भारत की किशनगंगा और रतले पनबिजली परियोजनाओं को लेकर आपत्ति जताते हुए मामले को हेग स्थित मध्यस्थता तंत्र तक पहुंचाया था. जिसे लेकर भारत का लगातार यह कहना रहा है कि संधि के प्रावधानों के तहत इस तरह के ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ का गठन ही अवैध है. भारत ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया है.

15 मई 2026 को इस तथाकथित सीओए ने सिंधु जल संधि की व्याख्या और जल भंडारण क्षमता से जुड़े मुद्दों पर एक पूरक फैसला जारी किया, जिसे भारत ने तुरंत खारिज कर दिया. विदेश मंत्रालय ने दो टूक कहा कि भारत की ओर से सिंधु जल संधि को ‘अबयंस’ यानी निलंबित रखने का फैसला अभी भी लागू है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि पर विराम लगा दिया था. साफ संकेत दिए थे कि सीमा पार आतंकवाद और जल सहयोग साथ-साथ नहीं चल सकते. अपनी बातों पर रवैया स्पष्ट करते हुए भारत ने संधि के दायित्वों को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला लिया था.

भारत का रुख स्पष्ट और सख्त है. ये बताता है कि नई दिल्ली अब पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय कानूनी मंचों के दुरुपयोग के खिलाफ अधिक आक्रामक और स्पष्ट नीति अपना रही है. सरकार हर वैश्विक मंच पर दोहराती आई है कि आतंकवाद को लेकर वो सख्त है और किसी भी कीमत पर भारत की संप्रभुता या अखंडता पर प्रहार नहीं सह सकती.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top