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कोडरमा के सुमन लाल पारंपरिक कोल्हू घानी से 100% शुद्ध कोल्ड प्रेस्ड तेल तैयार कर रहे हैं. इसमें मूंगफली, नारियल, सरसों और तिल का सेहतमंद तेल शामिल है. तेलंगाना से ट्रेनिंग लेकर शुरू की गई इस पहल से बीजों के प्राकृतिक गुण सुरक्षित रहते हैं. इसे सीधे फोन से ऑर्डर कर सकते हैं.
कोडरमाः बढ़ती मुनाफाखोरी और सस्ते दाम की होड़ के बीच बाजार में मिलने वाले खाद्य तेलों की गुणवत्ता को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. कई विशेषज्ञ भी समय-समय पर मिलावटी और अत्यधिक प्रोसेस्ड तेलों को स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक बता चुके हैं. ऐसे दौर में कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड स्थित मासनोडीह गांव के किसान सुमन लाल मेहता पारंपरिक पद्धति से बैलों की सहायता से संचालित कोल्हू घानी के माध्यम से शुद्ध कोल्ड प्रेस्ड खाद्य तेल तैयार कर लोगों तक पहुंचा रहे हैं.
तेलंगाना में लिया प्रशिक्षण
सुमन लाल मेहता आधुनिक खेती के साथ-साथ शुद्ध खाद्य तेल उत्पादन को भी बढ़ावा दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस कार्य को शुरू करने से पहले उन्होंने तेलंगाना में 15 दिनों का विशेष प्रशिक्षण लिया. जहां पारंपरिक तरीके से कोल्ड प्रेस्ड तेल निकालने की तकनीक सीखी. प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने घर पर बैलों से चलने वाली कोल्हू घानी की स्थापना की. वर्तमान में तीन नंदी इस कोल्हू को संचालित करते हैं. उन्होंने बताया कि मूंगफली का तेल तैयार करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाली मूंगफली मध्य प्रदेश से मंगाई जाती है. करीब तीन घंटे तक कोल्हू चलाने के बाद लगभग चार लीटर शुद्ध मूंगफली का तेल प्राप्त होता है. एक लीटर तेल निकालने के लिए लगभग 2.6 से 2.8 किलोग्राम मूंगफली की आवश्यकता पड़ती है. यह तेल 500 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध कराया जाता है.
उच्च क्वालिटी के बीज का उपयोग
इसी तरह नारियल का तेल दक्षिण भारत से मंगाए गए सूखे नारियल से तैयार किया जाता है. एक किलो तेल के लिए करीब दो किलो सूखे नारियल की जरूरत होती है और ढाई घंटे में लगभग चार लीटर तेल तैयार हो जाता है. यह तेल 1000 रुपये प्रति लीटर में बेचा जाता है. सुमन लाल मेहता काले और पीले दोनों प्रकार के सरसों का तेल भी तैयार करते हैं. काले सरसों का तेल 550 रुपये प्रति लीटर मिलता है. जिसमें एक लीटर तेल के लिए लगभग साढ़े चार किलो सरसों की आवश्यकता होती है. वहीं पीले सरसों का तेल 600 रुपये प्रति लीटर उपलब्ध है. इसके अलावा सफेद तिल का तेल 750 रुपये प्रति लीटर तथा काले तिल का तेल भी पारंपरिक विधि से तैयार किया जाता है. जिसमें अधिक मात्रा में तिल की जरूरत पड़ती है.
कम तापमान पर धीरे-धीरे निकालते हैं तेल
सुमन लाल मेहता ने बताया कि कोल्हू घानी में तेल निकालने के दौरान तापमान काफी कम रहता है. जिससे बीजों के प्राकृतिक गुण काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं. उनका दावा है कि अत्यधिक गर्मी पर मशीनों से निकाले गए तेल की तुलना में यह पारंपरिक विधि तेल की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक होती है. उन्होंने बताया कि लोग शुद्ध और पारंपरिक तरीके से तैयार खाद्य तेल की ओर फिर से आकर्षित हो रहे हैं. लोग 9955910502 एवं 9931136851 पर संपर्क या व्हाट्सएप के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.